100 वर्ष में पहली बार मकर संक्रांति पर बना है ऐसा शुभ संयोग ! जानिए




बारह राशि के बारह संक्रांति होते हैं लेकिन धनु से मकर में संक्रमण सबसे महत्वपूर्ण है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है की सूर्य अपनी चरम यात्रा के बाद धनु से मकर में प्रवेश करता है। इसीलिए मकर संक्रांति का महत्व भारतीय संस्कृति में आदि काल से महत्वपूर्ण रहा है। makar sankranti importance

मकर संक्रांति को कई दृष्टियों से देखा जाता है। -इसे पिता और पुत्र यानी सूर्य एवं शनि के निकटता के रूप में भी देखा जाता है। वैसे ज्योतिष का मानना है कि शनि और सूर्य एक साथ नही होते हैं लेकिन मकरसंक्रांति के दिन आदित्य (सूर्य) देव स्वयं शनिदेव के यहां पहुंचते हैं। चूँकि मकर राशि का स्वामी शनि है और मकरसंक्रांति के दिन सूर्य अपनी राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं इसलिए इसे पिता पुत्र के नजदीकी के रूप में जाना जाता है। makar sankranti importance

22 दिसंबर को सूर्य उत्तरायण एवं 22 जुन को दक्षिणायन होता है।

कहते हैं की भीष्म पितामह ने सूर्य के उत्तरायण होने का इन्तजार अपने शरीर को त्यागने के लिए किया था। कहते हैं कि मकरसंक्रांति के ही दिन भगवान विष्णु ने दैत्यों का दलन करके उनसे विधिवत युद्ध के समाप्ति की घोषणा की थी । सभी दैत्यों के मस्तक को काटकर मंदार पर्वत के अंदर भगवान विष्णु ने स्वयं दवा दिया था। आज भी मंदार पर्वत पर बिहार के बांका जिला में इस अवसर पर विशाल मेले का आयोजन बड़े ही धूम धाम से किया जाता है। makar sankranti importance

मकरसंक्रांति के दिन ही भागीरथ ने अपने पूर्वजों का तर्पण किया था। इसी दिन गंगा सागर में जाकर समाहित हुई और महाराजा सगर के पुत्रों का उद्धार किया, इसलिए कई मायने में मकरसंक्रांति महत्वपूर्ण हो जाती है। आज भी गंगा सागर मेला के बारे में कहा जाता है कि सारे तीर्थ बार बार गंगा सागर एक बार। makar sankranti importance

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वैसे सायन गणना के अनुसार 22 दिसंबर को सूर्य उत्तरायण एवं 22 जुन को दक्षिणायन होता है। मिथिलांचल में इस अवसर पर खिचड़ी पर्व का आयोजन होता है। इसमें चावल दाल के साथ तिल डालकर लोग भोजन बनाते हैं। makar sankranti importance

सब कुछ मिलाकर बनाने का मतलब एकता का प्रतीक होता है। धर्म शास्त्र में नियमन की परम्परा आदिकाल से चली आ रही है। मकर शंक्रान्ति के दिन लोग तिल का तेल लगाकर नदियों में स्नान करते हैं एवं तिल गुड चावल आदि का भोजन एवं दान करते हैं इससे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
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