आडवाणी की राजनैतिक हत्या




लालकृष्ण आडवाणी के ऱाष्ट्रपति बनने का सपना बस अब दिल के आरमां आसूओं में बह गए। रामनाथ कोबिंद को भाजपा ने राष्ट्रपति पद के लिए अपना उम्मीदवार तय कर दिया। इसके जरिए कई संदेश दे गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। लेकिन जिस प्रकार से लालकृष्ण आडवाणी को नरेंद्र मोदी ने टीम से बाहर कर दिया। modi ne ki aadvaani ki rajanaitik hatya 

आडवाणी के लिए वह काफी निराशाजनक रहा । यह किनारा किया जाना उसी प्रकार से है जैसे आज के सामाजिक परिवेश में किया जाता है। जैसे परिवार के मुखिया को वृद्धाश्रम की शरण लेना पड़ता है। ऐसे ही राजनैतिक परिवेश में देखने को मिल रही है। लालकृष्ण आडवाणी ने अपने खून पसीने से एककर पार्टी को खड़ा किया और ऊंचाईयों पर पहुंचाया। modi ne ki aadvaani ki rajanaitik hatya 

आडवाणी कहीं के नहीं रहे

जब पार्टी से कोई नहीं जुड़ रहा था उस समय काफी मुश्किलों के साथ उन्होंने अन्य दलों को जोड़ा। लालकृष्ण आडवाणी को देश का प्रधानमंत्री के रूप में देखा जा रहा था। लेकिन उन्हें संघ ने किनारा कर दिया। लेकिन एक ऐसा पद बचा हुआ था जिसपर मोदी चाहते तो बैठा सकते थे लेकिन मोदी ने 2019 के मद्देनजर अपने पद को कायम रखने के लिए दलित चेहरा को चुना। modi ne ki aadvaani ki rajanaitik hatya 

वह भी उत्तर प्रदेश से। नरेंद्र मोदी का पता है कि देश भर से उन्हें इस पर समर्थन नहीं मिलने वाला। तो क्यों नहीं यूपी को ही साधा जाएं. यूपी में अब इन्हें 80 में 80 चाहिए। अब जरा उस गोधरा कांड को याद कीजिए। जब पूरा देश नरेंद्र मोदी के विरुद्ध था। अकेले लालकृष्ण आडवाणी गृहमंत्री रहते हुए गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी को कायम रखा। अब कोई भी ऐसा नेता आत्मघाती कदम नहीं उठाएंगा जैसा आडवाणी ने उठाया। modi ne ki aadvaani ki rajanaitik hatya 

उन्होंने गृहमंत्री रहते हुए नरेंद्र मोदी का पक्ष लिया। जबकि प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी नरेंद्र मोदी को राजधर्म निभाने की सलाह तक डे डाली थी। वैसे विपरीत समय में संसद में विपक्ष के रूप में कांग्रेस काफी उग्र थी। वैसे समय में भी लालकृष्ण आडवाणी नहीं झुके और बहुत मशक्कत के बाद संसद चली जिसके बाद ही अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें उपप्रधानमंत्री पद पर सुशोभित किया। लेकिन इसी गोधरा कांड के कारण ही 2004 के लोकसभा चुनाव में हार का मुख्य कारण बना। modi ne ki aadvaani ki rajanaitik hatya 

दिल के आरमां आसूंओं में बह गए

यहां तक कि कई सहयोगी दल भी उसे साथ छोड़ गए। लालकृष्ण आडवाणी ने इसको भी सहा। लेकिन संघ ने उन्हें किनारा कर दिया। जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री पद पर बैठे तो ऐसा माना जा रहा था कि नरेंद्र मोदी लालकृष्ण आडवाणी को राष्ट्रपति पद पर बैठाकर अपना कर्ज उतार लेगी। लेकिन नरेंद्र मोदी की ओर से कोई खास पहल नहीं किया गया। modi ne ki aadvaani ki rajanaitik hatya 

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खासकर जिस तरह से बाबरी मस्जिद केस में सीबीआई ने उनपर सख्ती दिखाई तभी अहसास हो गया कि अब आडवाणी जी के राजनीति रूप से हत्या हो चुकी है। निश्चिततौर पर नरेंद्र मोदी के इस कदम से आडवाणी कहीं के नहीं रहे। उनके दिल के आरमां आसूंओं में बह गए। modi ne ki aadvaani ki rajanaitik hatya