26 अप्रैल 2018 को है परशुराम द्वादशी,जानिए कथा





हिन्दू पंचांग के अनुसार वैशाख माह में शुक्ल पक्ष की द्वादशी को परशुराम द्वादशी मनाई जाती है। तदानुसार इस वर्ष गुरुवार 26 अप्रैल 2018 को परशुराम द्वादशी मनाई जाएगी। भगवान परशुराम अधर्म के संहार हेतु इस पृथ्वी पर प्रकट हुए थे तथा उन्होंने इक्कीस बार क्षत्रिय वंश का वध किया था। इस दिन पुरे देश में परशुराम जी की पूजा-अर्चना की जाती है। भगवान परशुराम की कृपा से व्रती के समस्त दुखों का नाश होता है।

परशुराम जन्म कथा  

हिन्दू धार्मिक पुराणो के अनुसार पौराणिक काल में महिष्मती नगर में हैयतवंशी क्षत्रिय नरेश सहस्त्रबाहु का शासन था। राजा सहस्त्रबाहु अत्यंत क्रूर तथा अत्याचारी था जिससे आम जनता हमेशा कुंठित रहता था। जब राजा का अत्याचार बहुत बढ़ गया तब माता पृथ्वी भगवान विष्णु जी के पास गई तथा उनसे राजा सहस्त्रबाहु के अत्याचारों को नाश करने का आग्रह किया।

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तत्पश्चात भगवान विष्णु जी ने माता पृथ्वी को वचन दिया की जब-जब धर्म का पतन होता है तो मैं अवश्य प्रकट होता हूँ। अतः धर्म कि स्थापना के लिए मैं महर्षि जमदगिन के घर पर पुत्र रूप में अवतार लेकर अत्याचारियो का सर्वनाश करूंगा। कुछ समय पश्चात भगवान विष्णु जी परशुराम रूप में अवतरित होते है और ।

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भगवान परशुराम ने क्षत्रिय के नरेश सहस्त्रबाहु का वध कर पृथ्वी लोक को पापियो के पापो से मुक्त करते है। भगवान परशुराम जी के क्रोध को महर्षि ऋचीक ने शांत किया तथा उनसे दान में पृथ्वी मांग लिया। भगवान परशुराम जी वचनानुसार मह्रिषी ऋचीक को दान में पृथ्वी देकर स्वंय महेंद्र पर्वत पर निवास करने चले गए।

भगवान परशुराम द्वादशी महत्व  

भगवान परशुराम जी शास्त्र एवम शस्त्र विद्या के पंडित थे तथा प्राणी मात्र का हित करना ही उनका परम लक्ष्य रहा है। उनकी उपासना से दुखियो, शोषितो, तथा पीड़ितों को हर प्रकार से मुक्ति मिलती है। अधिक जानकारी के लिए क्लिक करें www.hindumythology.org