दाना मांझी vs रियो ओलिंपिक मेडलिस्ट पीटर मालाचौस्की




दुनिया के सबसे बड़े लोकतान्त्रिक राष्ट्र में जंहा सविंधान ने राष्ट्र को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र की संज्ञा दी है। उस राष्ट्र में लोगों के साथ अमानवीय व्हवहार किया जाता है। ये केवल उड़ीसा की घटना को लेकर नहीं है बल्कि इस तरह का वारदात आये दिनों पुरे देश में कही न कही घटित होती रहती है। जिसे बाद में प्रशासन द्वारा लीपापोती कर ढक दिया जाता है। जबकि विश्व के मानचित्र पर एक छोटर सा देश पॉलैंड के ओलिंपिक में मेडलिस्ट रजत पदक विजेता ने मानवता का एक ऐसा परिचय दिया है जो हम सबके लिए बहुत बड़ा प्रेरणा का स्त्रोत बनता है ।  Piotr Malachowski medalist versus daana manjhi   

ज्ञात हो दो दिन पूर्व उड़ीसा राज्य में इस तरह की घटना घटी। जिसने सभी को झकझोर दिया है। ये घटना उड़ीसा राज्य में कालाहांडी जिले की है। जंहा जिले के भवानीपटना अस्पताल में दाना मांझी की 42 वर्षीय पत्नी अमंग देइ की टीबी से मौत हो गई थी । Piotr Malachowski medalist versus daana manjhi  

बुधिया सिंह और रियो ओलंपिक 2016

जिसके बाद जनजातीय दाना मांझी को अस्पताल प्रशासन ने एम्बुलेंस सेवा देने से इनकार कर दिया। गरीब दाना मांझी ने अस्पताल प्रशासन से काफी मिन्नतें की फिर भी उसकी पत्नी के शव को ले जाने के लिए एम्बुलेंस नहीं दी गई। थक हार कर दाना मांझी ने अपनी पत्नी का शव कन्धे पर उठाकर 12 वर्षीय पुत्री के साथ अस्पताल से 60 किलोमीटर दूर घर की ओर निकल पड़ा। Piotr Malachowski medalist versus daana manjhi    

अभी दाना मांझी ने 10 किलोमीटर का सफर तय किया था की कुछ लोगों ने उसके इस तरह जाने का औचित्य पूछा, जिसमें कुछ सवांददाता भी थे। तब दाना मांझी ने रोते हुए अपनी व्यथा बताई। इस बाबत मीडिया कर्मी ने जिले के कलक्टर को फोन के जरिये इतला किया। जैसे ही ये बात मीडिया के जरिये सोसल साइट पर वायरल हुआ। आनन्-फानन में एम्बुलेंस सेवा घटना स्थल पर पहुंची और दाना मांझी को उनके मृत पत्नी के शव को घर तक पहुंचाया । Piotr Malachowski medalist versus daana manjhi  

रियो ओलिंपिक मेडलिस्ट पीटर मालाचौस्की ने अपना पदक नीलाम किया Piotr Malachowski medalist versus daana manjhi  

ज्ञात हो की ओडिशा सरकार ने महापरायण योजना की शुरुवात की है जिसके जरिये मृत व्यक्ति के शव को उनके परिजनों के घर तक निःशुल्क पहुँचाने का प्रावधान है। फिर भी ओडिशा में अस्पतालों की मनमानी जारी है। ये वाकया केवल दाना मांझी के साथ घटित नहीं हुई है बल्कि रोज इस तरह की घटना भारत में घट रही है पर सरकार मूक दर्शक बनी रहती है। Piotr Malachowski medalist versus daana manjhi   

पब्लिक में सार्वजनिक होने पर सरकार महज जाँच का आदेश देती है और सहानभूति में दो लाइन का सन्देश और मामूली रकम देकर मामले को दबा दिया जाता है। सरकार की निकम्मापन साफ़ झलकती है कि सरकार और प्रशासन केवल झोली भरने में लगी रहती है।

हम इस मसले के लिए संभ्रात और सामर्थ्य लोग पर भी दोषारोपण करना चाहेंगे। जो देश में गरीबी को दूर करने का प्रयास भी नहीं करते है। एक और जंहा पीएम मोदी के अनुरोध को स्वीकार करते हुए सामर्थ्य लोगों ने एलपीजी सब्सिडी छोड़ दी, ठीक उसी तरह का प्रयास सामर्थ्य लोगों को देश से गरीबी हटाने के लिए भी करना चाहिए। छोटी-छोटी कोशिशों से बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। यदि दाना मांझी की बेटी को सरकार और अमीर वर्ग सहयोग दें तो वो भी ओलिंपिक में भारत को मैडल दिला सकती है

रियो ओलम्पिक में भारत को दो पदक मिले एक साक्षी मलिक और दूसरा पदक पी वी सिंधु को मिला है। जब तक पदक नहीं मिला था सरकार इससे दुरी थी यंहा तक की पीवीसिंधु का नाम खेल रत्न सम्मान से हटा दिया गया था। आज जब पीवी सिंधु ने बैडमिंटन में रजत पदक जीता है तो न केवल सिंधु को खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा बल्कि इनामों की बौछार भी होने लगी है।

पॉलैंड देश की एक तीन वर्षीय बच्ची ओलेक सजयमानस्कि को Eye cancer है Piotr Malachowski medalist versus daana manjhi  

ये सरकार का  निकम्मापन है की देश में आज भी लोग गरीबी से मर रहे है। एक और जंहा भारत मंगल पर पहुंच चूका है वही देश में गरीब वर्ग जीवन यापन करने के लिए आज भी संघर्ष कर रहे है । इससे तो अच्छा पॉलैंड देश है जंहा आज की तारीख में ओलिंपिक मेडलिस्ट ने मानवता का अनूठा उदाहरण पेश किया है। Piotr Malachowski medalist versus daana manjhi  

डिसकस थ्रो में पॉलैंड देश को रजत पदक दिलाने वाले एथलीट पीटर मालाचौस्की ने अपने पदक को सिर्फ इस बात के लिए नीलाम कर दिया क्योंकि पॉलैंड देश की एक तीन वर्षीय बच्ची ओलेक सजयमानस्कि Eye cancer से जूझ रही है और पर्याप्त धन न होने के कारण इलाज के लिए अमेरिका नहीं जा पा रही है। Piotr Malachowski medalist versus daana manjhi  

इस बाबत तीन वर्षीय ओलेक सजयमानस्कि की माँ ने रियो ओलिंपिक मेडलिस्ट पीटर मालाचौस्की को पत्र लिखकर सहायता की याचना की जिसे रजत पदक विजेता पीटर मालाचौस्की ने तत्काल स्वीकार कर अपने पदक की नीलामी कर मिले धन को उस बच्ची के नाम कर दिया है।

अब तीन वर्षीय ओलेक सजयमानस्कि Eye cancer के इलाज के लिए अमेरिका जा सकती है और आशा करते है की वो जल्दी ही स्वस्थ हो जाएँगी। रियो ओलिंपिक मेडलिस्ट पीटर मालाचौस्की ने कहा कि रियो में मेरी नगाहें गोल्ड पर थी पर मैं चूक गया अब निगाहें उस बच्ची पर है जिसके लिए मैंने अपने पदक की नीलामी की है। रियो ओलिंपिक मेडलिस्ट पीटर मालाचौस्की ने लोगों से अनुरोध किया है की सभी मिलकर उस बच्ची के लिए प्रार्थना करें। हमारे देश की सरकार और प्रशासन को पीटर मालाचौस्की से सीख लेना चाहिए। Piotr Malachowski medalist versus daana manjhi  

( प्रवीण कुमार )