प्रधानमंत्री बनने के लिए नेहरू ने नेता जी को मृत घोषित किया था pm nehru said neta ji dead





प्रवीण कुमार,
नेता जी सुभाष चन्द्र बोस को लेकर न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी कई अफवाहे कांग्रेस ने फैलाई कि नेताजी आतंकवादी थे, नेता जी उग्र विचारधारा के समर्थक थे, नेता जी की मृत्यु विमान हादसे में हो गई थी किन्तु वास्तविकता कुछ और है और शायद आज के युवा पीढ़ी व देश-विदेश के लोग इस बात से तब जानकारी हुई जब मोदी सरकार ने 26 जनवरी को कांग्रेस पार्टी के काले कारनामे को सार्वजानिक किया। इस वर्ष 26 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेता जी से संबंधित 100 फाइलों को सार्वजनिक किया और नेता जी की फ़ाइल सार्वजानिक होने पर देश के लोगो को पता चला कि नेता जी की मृत्यु विमान हादसे में नहीं हुई थी बल्कि कांग्रेस पार्टी ने उन्हें जीवित अवस्था में मृत घोषित कर दिया।

सार्वजानिक हुए फाइलों से पता चला कि तत्कालीन प्रधानमंत्री ने इस संबंध में इंग्लैंड के तत्कालीन प्रधानमंत्री एटली को पत्र लिखकर इत्तला किया था कि आप जिस आतंकवादी को ढूंढ रहे है वो फ़िलहाल सोवियत संघ की सरण में है। हालांकि, इसके बाद एटली ने कोई प्रतिक्रिया नहीं की थी । इसके बाद पीएमओ ने नेता जी से सम्बन्धित और 50 फाइलों को सार्वजानिक किया, सार्वजनिक हुए फाइलों में नेता जी के जीवित होने का प्रमाण मिला है। इस फाइलों में दो ऐसे पत्र भी प्राप्त हुआ जिसमें लिखा था कि नेता जी ने 1945 में एक बार और 1946 में दो बार रेडियो पर लाइव भाषण दिया था।

नेता जी से सम्बन्धित फाइलों के सार्वजिनक होने से लोगों को पता चला कि कांग्रेस जान बुझ कर नेता जी को भारतीय राजनीति से दूर रखना चाहती थी क्योंकि कांग्रेस पार्टी को अंदेशा था कि यदि नेता जी देश में एक्टिव रहे तो जवाहर लाल नेहरू प्रधानमंत्री नहीं बन पाएंगे । हालंकि, 1947 में जब प्रधानमंत्री चयन के लिए वोटिंग हुई तो नेहरू जी सरदार वल्लभ भाई पटेल से पराजित हो गए थे किन्तु गांधी जी के अनुरोध पर सरदार बल्लव भाई पटेल ने प्रधानमंत्री पद को त्याग कर जवाहर लाल नेहरू के लिए प्रधानमंत्री पद को रिक्त कर दिया था। जिसके बाद कांग्रेस ने सर्वसम्मति से जवाहर लाल नेहरू को देश का प्रथम प्रधानमंत्री बनाया गया।

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 नेता जी सुभाष चन्द्र बोस मृत्यु से सम्बन्धित तक़रीबन 200 फाइलों को मोदी सरकार ने सार्वजानिक किया है। इस फाइलों में नेता जी के मृत्यु को लेकर अटकलों से सम्बन्धी तमाम तथ्यों का उजागर किया गया है। इसी क्रम में नेता जी से सम्बन्धी एक अन्य लेकिन मुख्य जानकारी सार्वजानिक हुई है कि देश की आजादी में नेता जी का महत्वपूर्ण योगदान था। अंग्रेजों ने गांधी जी के सत्याग्रह आंदोलन के बजाय नेता जी के डर से देश को आजाद किया था। नेता जी सुभाष चन्द्र बोस पर स्टडी करने वाले रिटायर्ड मिलिट्री हिस्टोरियन जीडी बख्शी ने अपनी किताब ‘ इंडियन समुराई: बोस’ में इस बात को लिखी है कि ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री एटली ने कहा था कि नेता जी के नेशनल आर्मी ने भारत को आजादी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जबकि गांधी जी के असहयोग आंदोलन का असर बहुत कम था।

इसी क्रम में 27 मई को नेता जी से सम्बन्धित कुछ और फाइलों को सार्वजनिक किया गया जिससे यह संकेत मिलता है कि नेता जी 1960 के दशक में पचिम बंगाल के उत्तर में शलिमुरी आश्रम में के के भंडारी के नाम से रहते थे। सार्वजनिक हुए फाईलों में के के भंडारी को नेता जी को कहा गया है।