प्रभु की रेल हुई फेल





रेलवे आम आदमी कि सुविधाओं के लिए कई तरह के व्यवस्था की है जिसमें ई कैटरिंग सर्विस है। जिस मकसद से इसे लांच किया गया उसको वह आज भी पूरा नहीं कर पा रहा है। आईआरसीटीसी ने ई कैटरिंग सर्विस लांच किया था जिसका मकसद था कि यात्रियों को चलती ट्रेन में ताजा, स्वादिष्ट खाना पहुंचाना, जो उनको बजट में आ जाए। ई कैटरिंग की सुविधा लेकर यात्री अपनी संबंधित स्टेशन पर डिलीवरी करने वाले रेस्तरां से खाना ट्रेन में ही मंगवा सकते हैं। यह सर्विस काफी अच्छी है इसके कुछ अच्छे परिणाम भी सामने आए हैं लेकिन ज्यादातर जगहों पर वेंडर्स की मनमानी से अपने उद्देश्य से भटक गई है। निश्चिततौर पर जिस प्रकार से वेंडर्स मनमानी कर रहे हैं यह रेलवे के संज्ञान में भी है। लेकिन चाहकर भी वे एक्शन नहीं ले पाते हैं। दरअसल वेंडर्स ने अपने कुछ ऑर्डर वैल्यू तय कर दिए हैं जिसमें ऑर्डर उतने रुपये का होगा तभी वह खाना पहुंचाएंगें। यह समझने वाली यह बात है कि न्यूनतम बिल की सीमा अगर 100, 200 या 300 रुपए तक आर्डर करना ही होगा। यह न्यूनतम बिल आम आदमी के पॉकेट के अनुसार ही था लेकिन वेंडर्स ने न्यूनतम ऑर्डर मूल्य 1500,2000 और 3000 रुपए तक तय कर रखा है। साफ है अगर किसी यात्री को भूख लगी है तो इन स्टेशनों पर वेंडर्स से खाना मंगाना है तो कम से कम दो हजार या तीन हजार का खाना ऑर्डर कम से कम करना ही होगा। prabhu ki rail huyi fail

अब धुप से चलेगी ट्रैन

आईआरसीटीसी के जनसंपर्क अधिकारी का कहना है कि निश्चिततौर पर पहले कुछ स्टेशनों पर ऐसी शिकायतें मिली थी जिसे सुलझा लिया गया। अभी कुछ स्टेशनों पर वेंडर्स ने न्यूनतम ऑर्डर वाली शर्त लगा रखी है। लेकिन अभी रेलवे इस मामले में कुछ नहीं कर सकता है। रेलवे का यह भी कहना है कि जिन स्टेशनों पर वेंडर्स ने ऐसी न्यूनतम ऑर्डर की शर्त रखी है उसके आसपास हमें कोई पार्टनर नहीं मिला। जिसके कारण ऐसा हो पा रहा है। हालांकि जिस प्रकार से रेलवे ने जो तर्क दिया है वह सही नहीं लग रहा है। क्योंकि ऐसे स्टेशन कानपुर सेंट्रल, लखनऊ, दिल्ली, आनंदविहार जैसे हैं जहां पार्टनर की कोई कमी नहीं होना चाहिए। यह सभी स्टेशन शहर के बीचोबीच है, रेलवे के लापरवाही के चलते यात्रियों को आज भी काफी कष्ट उठाना पड़ रहा है। prabhu ki rail huyi fail



दूध के साथ कभी नमक या बैंगन तो नहीं खाया