जानिए क्या हुआ जब गुस्साए पब्लिक ने पत्थर मार इंदिरा गाँधी के नाक तोड़ दिए !




बात 1967 की है, जब इंदिरा गाँधी स्वतंत्र पार्टी के गढ़ उड़ीसा पहुंचे और लोगों को सम्बोधित करने की कोशिश की। उसी वक्त उक्त भीड़ ने इंदिरा गाँधी पर पत्थर बरसाना शुरू कर दिए। स्थानीय नेताओं ने इंदिरा गाँधी से अपने भाषण को तुरंत समाप्त करने की गुजारिश की लेकिन इंदिरा नहीं मानी और भाषण देती रही। गाँधी अभी भीड़ से कह ही रही थी कि क्या आप देश को इसी तरह बनाएंगे ? क्या आप लोगों को इसी तरह वोट देंगे। उसी समय एक पत्थर उनकी नाक पर आ लगा और नाक से खून बहने लगा। नाक टूटने के बाबजूद इंदिरा गाँधी नहीं मानी और अपने दोनों हाथों से बहते खून को पोंछा। तब तक उनकी नाक की हड्डी टूट चुकी थी। public pelting stone indira gandhi

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इसके बाद अगले कई दिनों तक उन्होंने चेहरे पर प्लास्टर लगाकर चुनाव प्रचार किया। ऐसा बताया जाता है कि इंदिरा गाँधी अपने नाक को लेकर संवेदनशील रहती थी इसलिए उन्होंने बाद में कहा था कि प्लास्टर में उनकी शक्ल बिलकुल ‘बैटमैन’ जैसी हो गई है. इस बारे में ‘इंदिरा: इंडियाज़ मोस्ट पॉवरफ़ुल प्राइम मिनिस्टर’ किताब लिखने वाली सागरिका घोष कहती हैं, कि इससे पता चलता है कि वो कितनी साहसिक थी और उनके अंदर कितना जोश और लड़ने की क्षमता थी। नाक टूटने के बाद काफी खून बह गया फिर भी इंदिरा नहीं घबराई और चुनाव प्रचार जारी रखा। मुझे नहीं लगता है कि उनके पोते राहुल गाँधी ऐसा कर पाएंगे की नहीं, जैसा उनकी दादी ने कर के दिखाया था।  public pelting stone indira gandhi

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