बोफोर्स मामले में बढ़ सकती है सोनिया गाँधी की मुसीबते है





कांग्रेस सरकार की चूलें हिला देने वाली बोफोर्स घोटाला एक बार फिर सुलगने वाला है। सीबीआई फिर से जांच के लिए केंद्र सरकार से इजाजत मांगेंगी।कांग्रेस को एक बार फिर मुश्किलों को सामना करना पड़ सकता है। दरअसल बोफोर्स घोटाले का चापटर यूपीए सरकार ने बिल्कुल क्लोज कर दिया था लेकिन संसद की पब्लिक अकाउंट्स कमेटी यानी पीएसी के निर्देश पर सीबीआई इसकी फिर से जांच के लिए केंद्र सरकार से इजाजत मांगेंगी। दरअसल कैग की लंबित रिपोर्टस की जांच कर रही पीएसी की उप समिति के अध्यक्ष बीजद नेता भातृहरि माहताब ने सीबीआई को खास निर्देश जारी करते हुए कहा है कि बोफोर्स घोटाले के सिस्टैमिक फेल्युअर और घुस लेने के आरोपों की फिर से जांच करें। गौरतलब है कि यूपीए सरकार में दिल्ली हाईकोर्ट ने 2005 में बोफोर्स सौदे को लगभग समाप्त कर दिया था जिसे अब फिर से उच्चतम न्यायालय ले जाने को कहा गया है। भाजपा सासंद व पीएसी सदस्य निशिकांत दुबे ने कहा है कि अगर बाबरी विध्वंस मामले में भाजपा नेताओं के खिलाफ आरोप फिर से निर्धारित हो सकते हैं तो बोफोर्स मामले में क्यों नहीं। restart bofors scam investigation 

साजिश रच रहे थे राहुल गाँधी





सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा ने कहा है कि इसके लिए केंद्र सरकार से इजाजत लेनी होगी जिस पर पीएसी ने कहा कि एजेंसी अपना काम करें केंद्र सरकार को क्या फैसला करना है यह वह छोड़ दें। गौरतलब है कि यह माना जा रहा था कि बोफोर्स मामला पूरी तरह से डेड हो गया है लेकिन दिसंबर 2016 में इसका जिक्र उस समय उच्चतम न्यायालय में हुआ जब सीबीआई ने बताया कि केंद्र की तत्कालीन यूपीए सरकार ने उस मामले में अपील दायर करने की इजाजत नहीं दी थी। पीएसी की यह उपसमिति बोफोर्स सौदे पर 1986 मे सीएजी की रिपोर्ट के कुछ ऐसे पहलुओं की जांच कर रही है जिसमें नियमों का पालन नहीं किया गया है। बोफोर्स तोप सौदे के चलते राजीव गांधी सरकार घेरे में आ गई थी जिसके बाद कांग्रेस की बड़ी हार हुई थी। इस मामले के आरोपी इटली के व्यापारी ओत्तावियो क्वात्रोकी की गांधी परिवार से काफी नजदीकी रिश्ते थे जिसको लेकर अब भी सवाल सुषमा स्वराज ने संसद में उठाई थी जब उनपर ललित मोदी के रिश्ते को लेकर सवाल उठाए गए थे। restart bofors scam investigation

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