तीन बार राम बोलने से दुःख दूर होता है वही तीन बार तलाक बोलने से दुःख शुरू होता है : संबित पात्रा




तीन तलाक के बहस के दौरान तर्क दिए गए कि तीन तलाक आस्था का विषय है जिसको लेकर लगातार विरोध में भाजपा ने भी बयान दिए हैं। आखिर जिससे कष्ट हो उसे आस्था का विषय कैसे कहा जा सकता है। भाजपा के प्रवक्ता संवित पात्रा ने कहा है कि जिसे तीन बार कहने से कष्ट शुरू होता है वह आस्था का विषय कैसे हो सकता है। जबकि तीन बार राम बोलने से दुःख दूर हो जाता है। sabit patra teach lesson kapil sibbal

तीन तलाक पर बहस जारी है

दरअसल संवित पात्रा ने वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल पर निशाना साधा है जिसमें उन्होंने उच्चतम न्यायालय के सामने यह तर्क दिया जिस प्रकार से अयोध्या का विषय आस्था का मसला है उसी तरीके से तीन तलाक आस्था का विषय है जिसे खत्म नहीं किया जा सकता है। यह शरियत के अनुसार है। sabit patra teach lesson kapil sibbal

गौरतलब है कि कपिल सिब्बल ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की तरफ से उच्चतम न्यायालय में अपना पक्ष रख रहे थे। उनका कहना है कि यह 1400 साल पुराना मसला है जिसपर तर्क वितर्क नहीं होना चाहिए। जो कुछ करेगा वह पर्सनल लॉ करेगा। उच्चतम न्यायालय में तीन तलाक पर ऐतिहासिक बहस जारी है जिसमें दोनों पक्षों को समय दिया गया है। sabit patra teach lesson kapil sibbal

आस्था का विषय

जिसमें पांच सदस्यीय न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ सुनवाई कर रहा है। जिसमें सभी धर्मों के न्यायाधीश है। कपिल सिब्बल के इस बयान पर काफी बहस शुरू हो गई है जिसमें उन्होंने तीन तलाक को राम के मुद्दे से जोड़ दिया है। sabit patra teach lesson kapil sibbal

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संवित पात्रा ने साफ तौर पर कपिल सिब्बल को निशाने पर ले लिया है कि राम बोलने से कई कार्य सिद्ध हो जाते हैं इससे आस्था जुड़ा है और काम होते हैं। लेकिन तीन तलाक बोलने से मुस्लिम औरतों को दुःख शुरू हो जाता है आखिर यह कैसे आस्था का विषय हो सकता है। अभी तीन तलाक पर बहस जारी है जिसमें पक्ष के बयान को भी संवैधानिक पीठ सुनेगा। गर्मियों की छुट्टी में भी उच्चतम न्यायालय ने यह बहस जारी रखी है। sabit patra teach lesson kapil sibbal