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अब भारत ने पाक से बदला लेने की एक नई तरकीब खोज ली हैं। अब भारत पाक से जल वितरण समझौते के तहत चलेगा एक नया पैंतरा। जिसके तहत अब वह पश्चिमी नदियों के पानी का भी इस्तेमाल करेगा। sindhu river water agreement 

उड़ी हमले के बाद पाकिस्तान पर दबाव बनाने के लिए भारत सिंधु जल समझौते पर कूटनीति कर रहा हैं विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने नाराज़गी व्यक्त करते हुए कहा हैं की 56 सालो से चली आ रही इस संधि को क्यों अभी तक जारी रखा जा रहा हैं ।

वहीं इस पर विशेषज्ञों का कहना हैं की यह एक अव्यावारिक पूर्ण कदम होगा हम दूसरे पहलु से भी पाकिस्तान पर नकेल कस सकते हैं। जिसमे सिंधु कमीशन बैठको को रद्द करने तथा पश्चिम नदियों के जल का इस्तेमाल करने जैसे अहम् कदम शामिल हैं। sindhu river water agreement 

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विशेषज्ञों ने यह भी बताया की मात्र पश्चिम नदियों के पानी का इस्तेमाल करने भर से ही पाकिस्तान पर काफी दबाव बनेगा जो की अब तक भारत ने किया नहीं था। और यह आदम भारत का समझौते के अंतरगर्त भी आता हैं जिस पर पाकिस्तान उंगली नहीं उठा सकता। sindhu river water compromise 

भारत के पास जल संग्रहण के लिए व्यवस्था नहीं हैंsindhu river water agreement 

हालांकि अभी भारत के पास जल संग्रहण के लिए व्यवस्था नहीं हैं क्योंकि आज तक भारत ने पश्चिम नदियों के पानी का इस्तेमाल नहीं किया है किन्तु अब पाकिस्तान पर दबाव बनाने के लिए भारत यह कदम अहम् माना रहा हैं। sindhu river water agreement 

दरअसल 1960 में हुए इस समझौते में 6 नदिया शामिल हैं सिंधु , सतलुज ,रावी , चिनाब ,झेलम ,व्यास। इस संधि के तहत पूर्वी 3 नदियों ब्यास ,रावी ,सतलुज के जल का इस्तेमाल भारत बिना किसी भी बाधा के कर सकता हैं। sindhu river water agreement 
( सलोनी पांडेय )