23 अप्रैल कश्मीर के पत्थरबाजों के लिए ज़िंदगी का अंतिम दिन होगा !




बुरहान वाणी की मौत के बाद कश्मीर में जो तांडव कश्मीरी युवाओं ने मचाया है। उससे पुरे देश में रोष है। खासकर, उत्तर भारत के राज्यों में विशेष रोष है। हाल ही में घाटी में उपचुनाव हुआ। जंहा कश्मीरी पत्थरबाजों ने जमकर तोड़फोड़ की, सेना के जवानो पर पत्थर बरसाए, उनके हथियार को लूट लिया। stone pelters versus modi govt 

सेना ने भी जबाबी करवाई करते हुए कुछ लोगों पर हल्की लाठी चार्ज किया। वही घाटी के अन्य हिस्सों में सेना ने बचाव के लिए गोलीबारी की। जिससे 6 लोगों की मौत हो गयी। आंकड़ों के अनुसार पिछले 9 अप्रैल से अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है। वही 250 से अधिक लोग घायल हुए है। stone pelters versus modi govt 

‘गुलेल पत्थरबाज दस्ता’ राष्ट्रपति शासन, आपातकाल

मोदी सरकार ने घाटी मुद्दे पर संज्ञान लेते हुए महबूबा मुफ़्ती को तलब किया है। सूत्रों से पता चला है कि महबूबा मुफ़्ती 23 अप्रैल को दिल्ली आएँगी। जंहा उनकी मुलाकात मोदी सरकार से होगी। इस मुलाकात में घाटी मुद्दे पर बातचीत होगी। stone pelters versus modi govt 

बता दें कि पिछले कुछ दिनों से मुफ़्ती सरकार राज्य में मूकदर्शक बन बैठी है। जिस कारण सेना भी मुफ़्ती से खफा है। सेना चाहती है कि राज्य सरकार पत्थरबाजों से निपटने के लिए सेना की मदद करे। वही मुफ़्ती सरकार राज्य में लॉ एंड आर्डर अपने हिसाब से चलाना चाहती है। stone pelters versus modi govt 

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इस सिलसिले में सेना ने मोदी सरकार को रिपोर्ट सौपी है। जिसका संज्ञान लेते हुए मोदी सरकार ने मुफ़्ती को दिल्ली बुलाया है। अब 23 अप्रैल को जब राज्य और केंद्र सरकार की बैठक होगी तो कश्मीर के पत्थरबाजों से निपटने के लिए कोई बड़ा फैसला लिया जा सकता है। जिसमें ‘गुलेल पत्थरबाज दस्ता’ राष्ट्रपति शासन, आपातकाल प्रमुख है। मोदी सरकार किसी भी सूरत में पत्थरबाजों से समझौता करने के मूड में नहीं है। सेना भी चाहती है कि उसे अपने हिसाब से मुद्दे को सुलझाने दिया जाये। ताजा घटना क्रम के अनुसार जल्द ही कश्मीर मुद्दे पर कोई न कोई बड़ा कदम उठाया जा सकता है। stone pelters versus modi govt 

( प्रवीण कुमार )