आतंकवादी का कोई धर्म नहीं होता, उसे दफनाए नहीं जला दें..




आतंक की आग में आज सारी दुनिया जल रही है। भारत ही नहीं अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, रूस, जर्मनी सहित पूरी दुनिया इस दावानल में झुलुस रहे है। जबकि आतंक का पर्याय बन चुके इस्लाम को मानने वाले इस्लामिक देश आज स्वयं इस भयानक रोग से ग्रसित है। terrorist must burn 

पता नहीं कौन सी जेहाद है ये, हर तरफ बम ब्लास्ट, खून-खराबा और लहू-लहान भागते बेगुनाह इंसानों कि सिर्फ चीख सुनाई देती है। इस्लाम को बदनाम करके शैतान अपना राज कायम करना चाहता है। इसके लिए कौन जिम्मेदार है ? जब सभी धर्म और धार्मिक लोगों का ये कहना है कि हमारा धर्म मानवता का सबसे बड़ा रहनुमा है, तो रहनुमाई में ये मार काट कहाँ से आ गई। terrorist must burn 

इसके पीछे कौन लोग हैं ? जबकि सारे शक्तिशाली देशों ने इन दुष्टों के खिलाफ अपना जंग शुरू कर दिया है। उन देशों के द्वारा भी बम बरसाए जा रहे है जिसमे भी अधिकांश बेगुनाह बेमौत मारे जा रहे हैं। इनकी एक ही गलती है की ये इस युग में इस धरती पर पैदा हो गए। वास्तव में इसके लिए दोषी कौन है ? जरूर कही न कहीं उनकी या उनके पुरखों की गलती हुई, जिसके कारण आज ये हमारे सामने लम्बे समय तक नहीं सुलझने वाली समस्या के रूप में खड़ी हो गई है। terrorist must burn 

कुरआन पढ़ने से बच्चे क्या बनेंगे terrorist must burn 

कोई कहता है यूरोप और अमेरिका महादेश इसके लिए दोषी है। किसी का कहना है अमेरिका के कारण नव आतंकवाद का जन्म हुआ। उसने ओसामा को पहले पैदा किया फिर जब उसे स्वयं नुकसान हुआ तो उसको खत्म कर दिया।

क्या ओसामा के मरने से आतंक समाप्त हो गया। मेरे समझ से आतंक फैलाना एक व्यक्ति का नहीं बल्कि एक विचार का काम है। विचार एक वायरस है, जो की बहुत से व्यक्तियों को एक साथ प्रभावित करता है। जिस प्रकार रोग से प्रभवित लोगों को दवाई या उपचार से ठीक किया जा सकता है। ठीक उसी प्रकार एक विचार को दूसरे विचार से ठीक किया जा सकता है। terrorist must burn 

भले आपको हमारी बातें अटपटी लगे लकिन ये एक तथ्य है जो, जीवन से जुड़ा हुआ है। सत्य, सत्य होता है न ये बड़ा होता है न ही ये छोटा होता है।

कहने का मतलब शांति के लिए युद्ध करना आवशयक है। जिन्दा रहने के लिए मारना जरूरी है। अब बानगी देखिए राम है तो रावण है,कृष्ण है तो कौरव और कंश है। इधर ओबामा था तो उधर ओसामा। इसे क्या कहेंगे ? कहने का तातपर्य प्रकृति सबका समाधान करती है। terrorist must burn 

जिस तरह रावण के अत्याचार का विरोध विभीषण ने किया ठीक उसी तरह से इस्लाम का विरोध सलमान रश्दी और तस्लीमा नसरीन जैसे चिंतकों ने किया। उन्होंने अपने विचार से ही मलाला यूसुफजई जैसी सख्सियत पैदा की।

आतंकवादी का कोई धर्म नहीं होता है terrorist must burn 

तस्लीमा तो अभी हाल में बोली है की अधिक कुरआन पढ़ने से बच्चे आतंक वादी बनेंगे। ढाका में आतंकी हमले के बाद तारेक पतेह ने सोसल साइट पर एक ट्वीट कर कहा कि आतंकवाद और आतंकवादी का कोई धर्म नहीं होता है। जो आतंकवादी मरते हैं उन्हें दफनाने के बजाय जलाया जाना चाहिए। terrorist must burn 

कश्मीर हमारा है, मरते दम तक इसे लेकर रहेंगे : नवाज शरीफ

अभी जाकिर नाईक,अजहर मशूद आदि अनेक नाम हैं जो पकिस्तान के गोद खेल रहे है। ये अपने विचारों से सीधे साधे किशोरों को बहकाकर आतंकवादी बना रहा है। एक तरफ बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा कि इस्लाम के साख को बचाने लिए आतंक वादियों को खत्म करना होगा।

इधर कश्मीर की मुख्य्मंत्री महबूबा ने भी कहा की आतंकवादियों के कारण इस्लाम बदनाम हो गया। फिल्म अभिनेता इरफ़ान खान ने कहा कि मैं किसी फतवे से नहीं डरता, खुदा का शुक्र है कि में जिस देश में रहता हूँ वहां किसी धर्म के ठेकेदारों या धर्मगुरुओं का राज नहीं चलता है। terrorist must burn 

आइये अंत में आपको पवित्र कुरआन की सूरा नंबर 9 एवं आयत नंबर 5 प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसमे लिखा है –फिर जब हराम महीने बीत जाएँ तो मुशरिकों को जंहा कंही पाओ कत्ल करो,उन्हें पकड़ो और उन्हें घेरो और हर घात कि जगह उनकी ताक में बैठो।

फिर यदि वो तौबा करलें और नमाज क़ायम करें और ज़कात दें तो तुम उसका मार्ग छोड़ दो ;निश्चय ही अल्लाह बड़ा क्षमाशील, दयावान है। और यदि मुश्रिकों में से कोई तुमसे शरण मांगे तो तुम उसे शरण दे दो। यहां तक कि वह अल्लाह की वाणी सुन ले। फिर उसे उसके सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दो,क्योकि वो ऐसे लोग हैं जिन्हें ज्ञान नहीं है। terrorist must burn 
( हरि शंकर तिवारी )