ट्रैम्प समर्थक अमेरिका में करेंगे विद्रोह !

एक ओर जहाँ अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव अपने आखरी मुकाम पर पहुँच रहा है वहीँ दूसरी ओर यहाँ के प्रवल दावेदार डोनाल्ड ट्रैम्प ने एक बयां जारीकर कहा है की अगर हिलरी जीतती है तो हमारे समर्थ उसके जित का विद्रोह करेंगे। इस न्यूज़ को आज अमरउजाला ने इस प्रकार से प्रकाशित किया है.
अमेरिकी इतिहास में पहली बार राष्ट्रपति पद के लिए राजनीति का निचले स्तर गया है। तीन बहसों में भी इसकी स्पष्ट छाप दिखाई दी है। अब चुनावों के बाद अमेरिका जो इतिहास लिखेगा वह भी पहली बार ही होगा। रिपब्किन पार्टी के ट्रंप समर्थक खुलेआम धमकी दे रहे हैं कि यदि डेमोक्रेटिक पार्टी की हिलेरी क्लिंटन राष्ट्रपति बनीं तो वे चुनाव परिणामों को नहीं मानेंगे और विद्रोह करेंगे। हिलेरी के डेमोक्रेट समर्थक इसलिए परेशान हैं क्योंकि यदि चुनाव परिणाम ट्रंप के पक्ष में गया तो अब तक के इतिहास में अमेरिकी हित में लिए गए कई बड़े फैसलों को वह पलट डालेंगे।
रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप ने टीवी पर दूसरी सार्वजनिक बहस में ही कह दिया था कि यदि चुनाव परिणाम उनके पक्ष में नहीं आए तो वह उन्हें स्वीकार करने के लिए बाध्य नहीं होंगे। हमारे संवाददाताओं ने छह बड़े प्रांतों में चुनाव प्रचार कवर करते हुए ट्रंप समर्थकों से बात की तो उनका साफ कहना था कि वे अब अमेरिकी व्यवस्था को बदल डालना चाहते हैं। ग्रीन बे में एक रैली की व्यवस्था देख रहे 25 वर्षीय ट्रंप समर्थक जैर्ड हालब्रूक ने कहा कि यदि ट्रंप यह चुनाव हारते हैं तो यह ‘चुनाव की चोरी’ करने जैसा होगा और ऐसा होने पर अमेरिका में एक ‘क्रांतिकारी युद्ध’ होगा।
फ्लोरिडा, नार्थ कैरोलिना, ओहियो, पेनसिल्वेनिया और विस्कॉन्सिन प्रांतों में भी ट्रंप के समर्थकों ने इसी तरह की बातें कीं। दूसरी तरफ अमेरिका में बुजुर्ग मतदाता भी युवाओं के इस उबाल से चिंतित हैं। 75 वर्षीय रोजर पिलैथ ने कहा कि मुझे डर है कि चुनावों के बाद अमेरिका में कहीं दंगे न भड़क उठें।

यह तो सिर्फ एक बानगी है, ट्रंप समर्थक व्यवस्था के प्रति इससे भी कहीं ज्यादा नाराज हैं। जबकि दूसरी तरफ डेमोक्रेटिक इस बात से परेशान है कि हिलेरी का ई-मेल केस दुबारा खुलने के बाद के जिस प्रकार सर्वेक्षणों में ट्रंप के साथ हिलेरी का ‘मार्जिनल वोट गैप’ कम हुआ है, वह झकझोरने वाला हो सकता है। हिलेरी समर्थक  डेमोक्रेट्स मानते हैं कि यदि ट्रंप जीत गए तो अमेरिका के हित में लिए गए कई फैसले वह पलट देंगे।

खासतौर पर बंदूक और दवा लॉबी के दबाव में ट्रंप देश की नीतियों के साथ बड़े समझौते कर सकते हैं। इसके अलावा रूस के साथ ट्रंप पहले ही संबंध बढ़ाने की बात कह चुके हैं। इससे सीरिया और इराक के अभियान कमजोर पड़ सकते हैं। डेमोक्रेट इस बात से भी चिंतित हैं कि यदि ट्रंप की मेक्सिको दीवार बनाने अथवा मस्जिदों पर निगरानी की पहल कहीं अमेरिका को दंगों की आग में न झोंक दे।