अल्लाह ने हूर( औरत) को केवल निकाह, हलाला और तीन तलाक के लिए बनाया है : मुस्लिम पर्सनल लॉ




तीन तलाक को मुस्लिम पर्सनल लॉ ने इसे छेड़ने को नहीं कहा है। यह पुरातन पंरपरा से जारी है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने उच्चतम न्यायालय में साफ तौर पर कहा है कि यह पुरातन परंपरा है भले ही एक गुनाह और आपत्तिजनक हो। इसे सही बताया गया है। जिसे समाप्त करने की जरूरत नहीं है बल्कि इसके लिए समाज में जागरूकता लाने की जरूरत है। triple talaq vs muslim personal law

तर्कों को संवैधानिक पीठ सुन रहा है

वरिष्ठ वकील यूसुफ हातिम मनचंदा ने न्यायालय से कहा कि तीन तलाक का पालन 1400 साल से हो रहा है। जबसे यह धर्म अस्तित्व में आया। इसका दुरुपयोग नहीं हो इसपर कार्य करने की जरूरत है। मनचंदा एआईएणपीएलबी की कार्यकारिणी समिति के सदस्य भी हैं। गौरतलब है कि प्रसिद्ध वकील कपिल सिब्बल ने भी न्यायालय के सामने यह कह चुके हैं कि यह मसला आस्था का विषय है इसमें छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए। इसमें जो कुछ करेगा पर्सनल लॉ करेगा। पर्सनल लॉ कुरान व हदीस से लिया गया है। triple talaq vs muslim personal law

पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ बनाई गई है

तीन तलाक 1,400 साल पुरानी प्रथा है। कपिल सिब्बल ने न्यायालय के सामने यह कहा कि हम यह कहने वाले कौन होते हैं कि यह गैर इस्लामिक है। यह विवेक या नैतिकता का सवाल नहीं, बल्कि आस्था का सवाल है। यह संवैधानिक नैतिकता का सवाल नहीं है। गौरतलब है कि अभी उच्चतम न्यायालय ने लगातार तीन तलाक पर सुनवाई कर रहा है जिसमें पक्ष और विपक्ष दोनों के तर्कों को सुना जाएगा। triple talaq vs muslim personal law

यदि पूजा पाठ ढोंग नहीं है तो तीन तलाक कैसे ढोंग है : कपिल सिब्बल

अभी पक्ष के तर्कों को संवैधानिक पीठ सुन रहा है। तीन तलाक की सुनवाई के लिए पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ बनाई गई है जिसमें हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, पारसी सभी धर्मों के लोगों को रखा गया है। इस पीठ में प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति जगदीश सिंह केहर, न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ, न्यायमूर्ति रोहिंटन फली नरीमन, न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित तथा न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर शामिल हैं। triple talaq vs muslim personal law