उपराष्ट्रपति वैंकया नायडू की जीवनी





भाजपा ने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री एम वेंकैया नायडू को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया। वह राजग के उम्मीदवार होंगे। इनका मुकाबला विपक्ष के उम्मीदवार गोपाल कृष्ण गांधी से होगा। गोपाल कृष्ण गांधी के मुकाबले नायडू के पक्ष में ज्यादा मत है, इसलिए उनका राष्ट्रपति बनना लगभगत तय है। वेकैंया नायडू भाजपा के वरिष्ठतम नेता हैं और उन्होंने अपना सार्वजनिक जीवन 1970 से शुरू किया। नायडू विद्यार्थी परिषद से आगे बढ़ते हुए जेपी आंदोलन में सक्रियता से भाग लिया। आपातकाल के दौरान 1975 से 1977 तक वह जेल में भी रहे। वे आंध्र प्रदेश भाजपा युवा इकाई के अध्यक्ष भी रहे। वेंकैया नायडू भाजपा महासचिव और दो बार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। वे चार बार राज्यसभा सदस्य रहे। उनका 25 वर्षों का कार्यकाल बहुत सजगता रहा है। वे अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री रहे और अभी शहरी विकास एवं सूचना प्रसारण मंत्री भी रहे हैं। vainkya naidu life story

कौन होगा अगला उप-राष्ट्रपति?

जीवनी-
वेंकेया का जन्म 01 जुलाई 1949 को चावटपलेम, नेल्लोर जिला आंध्र प्रदे के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ है। इनकी प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा वीआर हाई स्कूल नेल्लोर में हुई। इन्होंने वीआर कॉलेज से राजनीति तथा राजनयिक अध्ययन में स्नातक किया। इन्होंने आंध्र विश्वविद्यालय से कानून में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। vice president election bjp candidate
जीवन संगिनी-
14 अप्रैल 1971 को इनकी शादी ऊषा से हुई। इनके एक बेटा और एक बेटी है।
बेटा- हर्षवर्धन
बेटी- दीपा वेंकट

समीक्षक बेटी दीपा वेंकट
वेंकैया नायडू की बेटी इनकी खास आलोचक रही हैं। भाजपा अध्यक्ष काल में देश भर में लगातार रैलियां वेकैया नायडू करते रहे और सप्ताह के अंत में अपने बंगला पर पत्रकारों से भी मेल मिलाप करते। यह उनकी निंरतर रुटिन में था। जब भी कोई बयान देते तो उसकी समीक्षा उनकी बेटी अवश्य करती। पत्रकारों के बीच में काफी लोकप्रिय हैं नायडू। vainkya naidu life story

राजनीति जीवन-
वेंकेया की पहचान एक आंदोलनकारी के रूप में रही है। वे स्पष्ट वक्ता और हिंदी और अग्रेजी को मिलाकर सटीक जवाब देने के लिए जाने जाते हैं। खासकर विपक्ष को चुप्प कराने में माहिर माने जाते रहे हैं। वेंकैया 1972 में आंध्र प्रदेश में पहली बार सुर्खियों में आए जब उन्होंने इस समय जय आंध्र आंदोलन में भाग लिया। इन्होंने इस दौरान नेल्लोर के आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया। और विजयवाड़ा से आंदोलन का नेतृत्व किया। 1975 में आपातकाल के विरोध में सड़क उतरे इसके कारण इन्हें जेल भी जाना पड़ा। 1977 से 1980 तक जनता पार्टी के युवा शाखा के अध्यक्ष रहे। 29 वर्ष के उम्र में 1978 में पहली बार विधायक बने। 1983 में भी विधायक चुने गए। नायडू राज्यसभा के लिए पहली बार 1998 में चुने गए। इसके बाद 2004,2010, 2016 में वह राज्य सभा के सांसद बने। 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में ग्रामीण विकास मंत्रालय का प्रभार संभाला। vainkya naidu life story
भाजपा अध्यक्ष के तौर पर-
2002 में नायडू पहली बार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए। वे दिसंबर 2002 तक अध्यक्ष रहे। इसके बाद 2004 में वह दोबारा अध्यक्ष बने। लेकिन राजग की हार के बाद अपना इस्तीफा सौंप दिया। वे वर्तमान में भारत सरकार के अंतर्गत शहरी विकास, आवास तथा शहरी गरीबी उन्मूलन तथा संसदीय कार्य मंत्री रहे।vainkya naidu life story
लालकृष्ण आडवाणी के पहले सारथी-
पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी जब देशभर में रथयात्रा निकाला तो उनके साथ सारथी के तौर पर पूरे देश में पहले सारथी वेंकेया नायडू ही थे। रथ यात्रा के बाद देश के केंद्रीय नेतृत्व के नजर में आ गए। जिसके बाद वे कभी पीछे मुड़ कर नहीं दिखे। आज भी लालकृष्ण आडवाणी के सबसे विश्वसनीय नेताओं में जाने जाते हैं। vainkya naidu life story
अध्यक्ष काल में अटल बिहारी वाजपेयी प्रशंसक-
जब वेंकेया नायडू भाजपा के अध्यक्ष बनाए गए और जगह जगह रैलियां आयोजित की जाती तो पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजेपयी सार्वजनिक तौर पर इनकी खूब प्रशंसा करते। अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा कि नायडू जैसे युवा और तेज तर्रार भाषण देने वाले नेता को देखकर हमलोगों में उत्साह भर आता है। नायडू के नेतृत्व में भाजपा से युवा नेता का जुड़ाव हुआ है। vice president election bjp candidate
केंद्रीय मंत्री-
1999-ग्रामीण विकास मंत्री,
2014- शहरी विकास, आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन और संसदीय मामलों के मंत्री,
2016- शहरी विकास, आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन तथा सूचना और प्रसारण मंत्री।



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