जागरूक होने की आवश्यकता




टीवी यानी ट्यूबरक्लोसिस। यह पहले बहुत ही खतरनाक बीमारी मानी जाती थी। यह एक संक्रामक बीमारी है लेकिन जैसे जैसे तेजी से इसके लिए दवाइयों की खोज हुई अब यह कोई गंभीर बीमारी नहीं माना जाता। लेकिन किसी भी बीमारी का इलाज तो ऐतिहात ही है। अगर उसे छोड़ दिया जाए तो तय है कि वह गंभीर हो ही जाएगा। ट्यूबरक्लोसिस एक संक्रामक बीमारी है। इसका वैज्ञानिक नाम माइक्रोबैक्टेरियम ट्यूबरक्लोसिस है। बैक्टीरिया शरीर के सभी अंगों में प्रवेश कर उन्हें रोग ग्रसित कर देता है। world tb diseases day 

यू तो टीबी की यह बीमारी ज्यादातर फेफड़े को प्रभावित करती है लेकिन आंतें, मस्तिष्क, हड्डियों, जोड़ों, गुर्दे, त्वचा, ह्दय जैसे शऱीर के किसी भी अंग पर इसका दुष्प्रभाव देखने को मिल सकता है। खैर इसके वैज्ञानिक पक्ष की ओर हम नहीं जाते हैं। टीबी के रोकथाम के लिए जहां केंद्र सरकार से कई कार्यक्रम चलाए गए वहीं प्रदेश सरकार ने इसके लिए अलग विभाग भी बनवाए हैं जिससे कई तरह की बीमारियों का इलाज संभव हो पाया है। world tb diseases day 

दरअसल सरकार द्वारा इतना कुछ करने के बाद भी आज प्रतिदिन चार हजार लोग टीबी की चपेट में आते हैं और एक हजार लोग मौत के शिकार हो जाते हैं। टीबी का इलाज ज्यादा कठिन नहीं माना जाता है। अगर समय पर इसका इलाज किया गया तो बहुत तेजी से रोगी ठीक होता है और पहले से ज्यादा स्वस्थ होता है। 24 मार्च 1882 को सर रॉबर्ट काक ने सबसे पहले टीबी के बैक्टीरिया के बारे में बताया था इसलिए इस दिन को विश्व टीबी के रूप में मनाते हैं। टीबी रोगियों के कफ, छींकने, खांसने, थूकने और सांस छोड़ने यानी कार्बनडाइऑक्साइड से वायु में बैक्टीरिया फैल जाता है जिस कारण स्वस्थ व्यक्ति भी आसानी से इसका शिकार हो सकता है। world tb diseases day 

हमें जागरूक होना होगा

विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर साल लगभग बीस लाख लोग टीबी की चपेट में आते हैं जिनमें से लगभग नौ लाख टीबी रोगियों से फैले संक्रमण के कारण इसकी चपेट में आते हैं। इनमें से 3.30 लाख लोगों की मृत्यु हो जाती है। भारत सरकार द्वारा जारी टीबी इंडिया 2012 की वार्षिक स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार 2009 के आंकड़े दर्शाते हैं कि तकरीबन चालीस प्रतिशत भारतीय टीबी से संक्रमित हैं। ये आंकड़ें इस बात का प्रमाण है कि आज भी टीबी की बीमारी भारत में एक गंभीर समस्या के रूप में व्याप्त है और इसका सबसे बड़ा कारण है जागरूकता की कमी होना। आजकल बड़े ही नहीं, बल्कि बच्चे भी इस रोग का तेजी से शिकार हो रहे हैं। world tb diseases day 

दरअसल हमारी सामाजिक और आर्थिक गिरावट तो इसका बड़ा कारण है ही, बदलते खान-पान और जीवनशैली की वजह से भी बच्चों में टीबी की समस्या सामान्य होती जा रही है। आजकल बच्चे ज्यादातर जंक फूड खाते हैं, जिससे उनमें पौष्टिकता कम हो गई है और इसी वजह से उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर पड़ गई है। इस कारण आज भी संक्रमण बच्चे को बहुत जल्दी घेर लेता है। टीबी के लिए लगातार सजग रहने की आवश्यकता है। टीबी का पूरी तरह इलाज संभव है। जगह जगह इसके वैक्सीन उपलब्ध हैं। world tb diseases day 

भारत सरकार के डॉट्स केंद्र देशभर में हैं जहां टीबी के इलाज की निःशुल्क व्यवस्था है। इन केंद्रों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां मरीज को केंद्र पर ही दवाई खिलाई जाती है, ताकि इलाज में मरीज की ओर से किसी तरह की कोताही न बरती जाए।

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दरअसल टीबी का इलाज पूरी तरह संभव है। इन दिनों इसके मरीजों को एंटी बॉडी टेस्ट के लिए भी कहा जाता है। जिस प्रकार से अभी भी यह पूरी तरह इलाज से संभव वाला कहा जाता है। टीबी कोई आनुवांशिक रोग नहीं है। यह किसी को भी हो सकता है। आईएमए ने भी कई तरह के कार्यक्रम चलाए हैं ताकि आम आदमी को इस बीमारी से निजात मिल सके। world tb diseases day 

इस बीमारी की खास बात यह भी है कि अगर इसका पूरा इलाज न किया जाए तो इस रोग को कभी खत्म नहीं किया जा सकता और व्यक्ति की मौत भी हो जाती है। लेकिन यह पूरी तरह से नैगिलेंसि के कारण ही होता है। बहरहाल आज जब पूरे विश्व में टीबी दिवस मनाया जा रहा है इस बीमारी से जड़ मिटाने का संकल्प हम लेना चाहिए। जितना पर्यावरण प्रदूषित होगा उतनी ही इस बीमारी के फैलने का भी डर बना होता है। आज अगर टीबी की बीमारी अगर गंभीर है तो इसका कारण जागरूकता की कमी है। इसको लेकर हमें जागरूक होना होगा। world tb diseases day