6 फरवरी 2018 को है यशोदा जयंती,जानिए व्रत की कथा एवं इतिहास




धार्मिक मान्यताओ के अनुसार फाल्गुन माह में कृष्ण पक्ष की पंचमी को यशोदा जयंती मनाई जाती है। तदनुसार, मंगलवार 6 फरवरी 2018 को यशोदा जयंती मनाई जाएगी। मैया यशोदा का नाम सुनते ही सबके मन में वात्शाल्य माता की छवि प्रकाशित हो जाती है।  yashoda jayanti vrat katha 

माता यशोदा का अर्थ है, जो दुसरो को यश दे, अपने में आनंदित रहे तथा दुसरो की प्रशंसा में अपना हर्ष करे। उन्हें ही यशोदा कहा जाता है। यह सब गुण माता यशोदा में व्याप्त था जिस फलस्वरूप भगवान श्री कृष्ण जी ने उन्हें अपनी माता के रूप में चुना। माता यशोदा को भगवान श्री कृष्ण जी ने पुत्र बन, उन्हें वात्सल्य सुख तथा सौभागय प्रदान किया।  yashoda jayanti vrat katha 

यशोदा माता की कथा

द्वापर युग में एक बार यशोदा जी ने पूर्व जन्म में धरा रूप में भगवान विष्णु की कठिन तपस्या की। जिसके फलस्वरूप भगवान विष्णु जी ने उन्हें दर्शन देकर वर मांगने को कहा। माता यशोदा प्रभु का अभिवादन करते हुए बोली, प्रभु मुझे आप पुत्र रूप में प्राप्त हो। yashoda jayanti vrat katha

भगवान विष्णु जी ने कहा, माता यशोदा आपकी इच्छा अवश्य पूरी होगी। भविष्य में मैं जब वासुदेव जी के यहाँ जन्म लूंगा। तब आपके तथा नंदबाबा के द्वारा मेरा पालन-पोषण होगा। कृष्ण पुराण में इस संदर्भ का विस्तृत वर्णन किया गया है। महराज कंस को ज्ञात था की उसकी हत्या देवकी तथा वासुदेव के पुत्र के हाथो होना है। yashoda jayanti vrat katha 

इस चन्द्रग्रहण में भूलकर भी न करें ये काम

इसलिए कंस ने देवकी तथा वासुदेव को कारागार में डाल दिया था तथा उनके प्रत्येक संतान की हत्या कर दी । तदुपरांत, वासुदेव जी ने कृष्ण जी के जन्म पर उन्हें नंदबाबा तथा माता यशोदा के यहाँ छोड़ आया था। इस प्रकार भगवान श्री हरि विष्णु यशोदा माता को दिए वचनो को पूरा किया।   yashoda jayanti vrat katha 

कृष्ण-लीला तथा माता यशोदा

जब कंस को पता चला की देवकी अपने पुत्र को नन्द बाबा के घर दे आये है तो उसने पूतना को कृष्ण को मारने के लिए भेजा। उस समय भगवान श्री कृष्ण ने पूतना के स्तन-पान कर उसके प्राण-पखेड़ु को हर लिया। मैय्या यशोदा तथा नटखट कृष्ण के मध्य वातसल्य धीरे-धीरे बढ़ने लगा। नटखट कृष्ण जी ने अपने बाल्यकाल में कंस द्वारा भेजे गए अनेको दैत्य का संहार किया। कृष्ण लीला अनुपम है। कृष्ण जी ने माता यसोदा को अपने नटखट से खूब सताया। अधिक जानकारी के लिए क्लिक करें www.hindumythology.org



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