योगी को सीएम बने रहने के लिए लड़ना पड़ेगा विधान सभा चुनाव




योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री तो बन गए हैं लेकिन वे न तो विधानसभा ना ही विधानपरिषद की सदस्य हैं। फिलहाल विधानपरिषद की कोई सीट खाली होती नजर नहीं आ रही है। ऐसे में विधानसभा चुनाव लड़ना ही उनके लिए विकल्प रह जाता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बने रहने के लिए विधानसभा चुनाव लड़ना अनिवार्य है। नियम के मुताबिक छह माह के भीतर योगी आदित्यनाथ को विधानसभा या विधानपरिषद का सदस्य होना अनिवार्य है।yogi uttar pradesh election 2017

जनता के बीच अच्छा संदेश जाए

योगी आदित्यनाथ गोरखपुर सीट से चार बार सांसद रह चुके हैं और यह पहला मौका है कि वे विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। योगी आदित्यनाथ के चुनाव लड़ने की जो सीटे को लेकर कयास लग रहे हैं वे हैं गोरखपुर सीट और कैम्पियरगंज विधानसभा। गौरतलब है कि गोरखपुर सीट से डॉ राधा मोहन दास अग्रवाल विधायक हैं जो योगी आदित्यनाथ के काफी करीबी हैं। yogi uttar pradesh election 2017

राधा मोहन दास सादगी वाले नेता हैं जिन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं दी गई है इसकी यही वजह है कि उन्हें लोकसभा में भेजा जा सकता है। दूसरे विधानसभा कैम्पियरगंज है जिसपर कयास लगाया जा रहा है कि यहां से भी योगी आदित्यनाथ चुनाव लड़ सकते हैं। यहां से फतेह बहादुर सिंह विधानसभा में हैं। जिन्हें योगी के नाम पर ही वोट हासिल होता है। फतेह बहादुर सिंह कई बार विधायक और मंत्री रह चुके हैं इन्हें लोकसभा भेजा जा सकता है। yogi uttar pradesh election 2017

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योगी आदित्यनाथ इन्हीं दो सीटों में एक सीट चुन सकते हैं ऐसे पूर्वांचल में कई ऐसे सीट हैं जिसपर योगी के ही पसंदीदा उम्मीदवार जीत कर आए हैं। गौरतलब है कि योगी आदित्यनाथ को शपथ ग्रहण के छह महीने के भीतर ही किसी जगह से चुनकर आना है। विधानपरिषद में सीट फिलहाल खाली नहीं होने वाली है ऐसे में विधानसभा चुनाव लड़ना ही इनके लिए विकल्प है। पार्टी हाईकमान भी यही चाहता है कि योगी आदित्यनाथ विधान परिषद से न होकर विधानसभा से ही चुनकर जाएं जिससे की जनता के बीच अच्छा संदेश जाए। yogi uttar pradesh election 2017