अरुणाचल में कांग्रेस की इज्जत तार-तार




तत्कालीन घटनाक्रम में अरुणाचल प्रदेश के राजनीति को शर्मशार कर दिया है। आज नबाव तुक्की सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विश्वास मत हासिल करने से पूर्व ही इस्तीफा दे दिया। जिससे राजनीति संकट बढ़ गई है। arunachal pradesh political crisis 

हालांकि,  कांग्रेस ने आनन -फानन में बैठक किया। जिसमें विधायकों को मनाया गया। इस बैठक में कांग्रेस के बागी विधायक भी शामिल हुए। इस बैठक में कांग्रेस के मुख्यमंत्री उम्मीदार का चुनाव हुआ। खांडू को नया चेहरा बनाया गया। अंतिम समय में कांग्रेस के इस तरह की राजनीति से लोकतंत्र की इज्जत तार-तार हो गया है। arunachal pradesh political crisis 

इस मामले के बाद केंद्र को सीधे अपने निशाने पर लेते हुए कांग्रेस पार्टी ने अपना धावा बोल दिया। कांग्रेस सरकार के पुनः बहाली पर जब पत्रकारों ने कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद से ये पूछा, कि क्या उत्तराखंड से आपको सिख नहीं लेनी चाहिए थी? इसके जबाब में कानून मंत्री ने कहा कि ये मामला उत्तराखंड के मामले से पहले ही, सर्वोच्च न्यायालय में लटका था जिसका फैसला अब आया है। arunachal pradesh political crisis 

क्या पुनः सरकार सुप्रीम कोर्ट जाएगी ?इसके जबाब में उन्होंने ये भी कहा कि हम हम फैसले का गहन अध्धय्यन कर रहे हैं उसके बाद इस पर निर्णय लिया जाएगा। हम इसके प्रभाव का आकलन करने के बाद इस बिषय पर निर्णय ले सकेंगे। रवि शंकर प्रसाद ने ये भी कहा की न्यायालय के आदेश की प्रति सरकार को नहीं मिली है। arunachal pradesh political crisis 

उन्होंने कहा कि अभी ये हमें मीडिया से ही ज्ञात हुआ है कि सर्वोच्च न्यायालय ने कांग्रेस समर्थित सरकार को बहाल कर दिया है। जब हमे इस पीठ के निर्णय की कांपी मिल जाएगी, उसके बाद में इस बिषय पर विचार विमर्श विस्तार से किया जाएगा।

कांग्रेस पहले अपने दामन में झांक कर देखे arunachal pradesh political crisis 

जब पत्रकारों ने ये कहा की ये कानून प्रबंधन की विफलता है इस पर तल्ख अंदाज में कानून मंत्री ने कहा की में आपसे दूर दूर तक सहमत नहीं हूँ। जस्टिस जे एस खेहर के नतृत्व में पांच जजों ने जो ऐतिहासिक फैसला सुनाया उससे एनडीए सरकार की किरकिरी कांग्रेस सरकार कर रही है।

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इसके जबाब में तपाक से रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि कांग्रेस पहले अपने दामन में झांक कर देखे। राज्यपाल ज्योति प्रसाद को जिस प्रकार जस्टिस जे एस खेहर ने असंबैधानिक करार दिया है उससे एन डी को कुछ कुछ बट्टा तो लगता ही है। arunachal pradesh political crisis 

ज्ञात हो जब 2015 में कांग्रेस में फुट पड़ी उसके बाद अल्पमत कह कर सरकार ने वहां राष्ट्रपति शासन लगा दिया था। घर फूटे गंवार लुटे वाली बात यहां चरितार्थ हो रही है। इसके लिए भी पहले कांग्रेस ही जिम्मेदार है की उसमे फुट पड़ी। अब जब सुप्रीम कोर्ट का सुप्रीम फैसला आ गया है तो कौन क्या करेगा? कानून मंत्री का समीक्षा के बाद न्याय पालिका पर गौर फरमाने की बात कही। arunachal pradesh political crisis
( हरि शंकर तिवारी )



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