वाघा बॉर्डर पर मारा जाता हाफिज सईद, हिन्दू सेना घात लगाये बैठी थी !





बुरहान बानी के मरने के बाद पाकिस्तान ने भारत पर अपना दवाब बनाने के लिए तरह तरह के हथकंडे अपना रहा है। हाफीज सईद कश्मीर चलो का नारा देकर अपने साथ आतंकियों की एक टोली लेकर चला और उसका साथ देने दूसरी ओर से सलाउद्दीन अपने काफिले के साथ चला। ये सब वाघा बॉर्डर की ओर भाड़ी संख्या में बढ़े चले आ रहे थे। hafiz sayeed encounter plan 

जरा सोचने वाली बात है की जो बुरहान बानी भारत में मारा गया वो कोई पाकिस्तानी नहीं था। वह एक हिन्दुस्तानी था ,कश्मीरी था। उसके ब्यान भड़काऊ और आतंकियों जैसे था। hafiz sayeed encounter plan 

हाफिज सईद  आता तो इस बार उसे टपका दिया जाता hafiz sayeed encounter plan

जमायते इस्लाम के चीफ सिराजुल हक़ के साथ हाफिज सईद का चलना इस बात का साफ़ संकेत था की वाघा बॉर्डर पर पहुंचते ही भीड़ में चल रहे आतंकी अवश्य कुछ न कुछ आतंक फैलाने का काम करते। ‘ hafiz sayeed encounter plan 

बुरहान वाणी बेकसूर था : नवाज़ शरीफ

अतः सुरक्षा के दृष्टि से सुरक्षा बलों ने वाघा बॉर्डर के गावों की सुरक्षा और बढ़ा दिया। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार रैली वाघा बॉर्डर से 8 किलोमीटर पहले बाटा गावँ में रोक लिया गया। कहने का मतलब उनकी मंशा जो थी वो किसी से छुपी नही है। पकिस्तान के इस नापाक इरादों को नाकाम करने के लिए हिन्दू सेना ने अपना कमर कस लिया था। hafiz sayeed encounter plan 

आतंकियों को जबाब देने के लिए हिंदुओं ने भी कमर कस ली है hafiz sayeed encounter plan 

नाम नही छपने की शर्त पर एक वरिष्ठ हिन्दू सेना अधिकारी ने बताया अगर इस बार हाफिज सईद वाघा बॉर्डर पर आ जाता तो उसे कोई नही बचा सकता था। इस बार हिन्दू सेना अपनी पूरी तैयारी के साथ इस ताक में थी की कब हाफिज सईद वाघा बॉर्डर पर आये, हिन्दू सेना की माने तो वो हाफिज सईद को मौत के घात उतारने के लिए पूरी तैयारी में थी। फिर चाहे इसके लिए हिन्दू सेना के जवानों को शहीद होना पड़ता। यदि एक बार सईद वाघा बॉर्डर पर आ जाता तो उसे जरूर हूर के पास उसी दिन भेज दिया जाता। । न रहता बांस न बजती बाँसुरी। hafiz sayeed encounter plan 

उनहोंने ये भी कहा की आईएसआई के लोगों ने शायद स्थिति को पहले भांप लिया था इसलिए वाघा बॉर्डर से पहले ही उन्हें एक सुनियोजित योजना के तहत रोक लिया गया। अब इन आतंकियों को जबाब देने के लिए हिंदुओं ने भी कमर कस ली है। अब उनके ही अंदाज में उनको कैसे जबाब दिया जाय इसकी पूरी तैयारी हिन्दू सेना ने कर ली है।

बुरहान एक दो बार चोरी-छुपे सीमा पार आजाद कश्मीर भी जा चूका था hafiz sayeed encounter plan

( ज्ञात रहे कि बुरहान बानी हिजबुल मुजाहदीन का कमांडर था और भारतीय फ़ौज को वर्षों से बुरहान वाणी की तलाश थी। बुरहान ने अपने प्रारम्भिक शिक्षा अपने पैतृक गांव से पूरी की थी, स्कूल की पढाई पूरी करने के बाद बुरहान अलगावादी के सम्पर्क में आया. यही से उसकी विचारधारा सीमा पार आतंकी संगठन से प्रभावित हुआ।

जिसके बाद बुरहान ने हिजबुल मुजाहदीन संगठन को ज्वाइन कर लिया। सुरक्षा बल की माने तो बुरहान एक दो बार चोरी-छुपे सीमा पर आजाद कश्मीर भी जा चूका था। जब कश्मीर में हिजबुल मुजाहदीन का पूर्व कमांडर मारा गया तो हिजबुल मुजाहदीन ने ये जिम्मेवारी बुरहान को सौप दी। बुरहान ने इसके बाद घाटी में कई आतंकी हमलों का नेतृत्व किया। इसके आलावा भी बुरहान हमेशा अपने गांव आया करता था।

ख़ुफ़िया विभाग के जरिये जब इस की खबर सुरक्षा बलों को हुई तो सुरक्षा बल ने बुरहान के गांव को घेर लिया। सुरक्षा बल ने पहले बुरहान को समर्पण के लिए कहा, बुरहान के समर्पण न करने पर सुरक्षा बलों ने बुरहान को मार गिराया।)

( हरी शंकर तिवारी )



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