चीन पर भारत का हमला




एनएसजी में नो एन्ट्री से खफा भारत अब पूरी तरह से बदला लेने के मूड में आ गया है। न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप में प्रवेश पाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अथक प्रयास किया लेकिन चीन के अड़ियल रवैये के कारण इसमें भारत को जब सफलता नहीं मिली तो भारत ने भी विश्व समुदाय को यह बताने का फैसला कर लिया कि हम भी उन महाशक्तियों के उन समझौतों को नहीं मानेंगे जिसके कारण उन्हें अधिक लाभ होने की सम्भावना है। india attack china

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वैसे उन्होंने इस मामले में किसी खास देश का नाम नहीं लिया लेकिन ये बात साफ़ है की इस मामले में चीन अंतिम समय तक अपने सहयोगियों के साथ डटा रहा की बिना एनपीटी पर हस्ताक्षर किये एनएसजी की सदस्यता भारत को नहीं मिल सकती। जबकि जिनपिंग से ताशकंद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब मुलाक़ात किया था उस समय तक उसने ये बात साफ़ नहीं किया की हम सियोल में आपका एनएसजी के मुद्दे पर साथ नहीं दूंगा। india attack china

भारत अब पूरी तरह से बदला लेने के मूड में आ गया है india attack china

सोचने वाली बात है 48 में से 38 देश भारत के पक्ष में मतदान किया। बाँकी के ये दशमुख रावण जिसका प्रमुख मुख चीन है उसको सबक सिखाने के लिए भारत जो रुख अख्तियार कर रहा है जिससे सांप भी मर जाये और लाठी भी न टूटे। अब भारत ने साफ़ तौर पर पैरिस क्लाइमेट चेंज अग्रीमेंट को मानने से इंकार कर दिया है। india attack china

ओबामा सरकार की सबसे महत्तवाकांक्षी योजनाओं में पैरिस क्लाइमेट चेंज एग्रीमेंट है। इसका पहला नतीजा तो ये सामने आया की अमेरिका के नेतृत्व में एनएसजी के सभी सदस्यों ने चीन पर भी भारत की दावेदारी का समर्थन में इस साल के अंत तक पुनर्विचार करने का दवाब बनाया है। जिससे भारत की उम्मीद इस मामले में कायम है। india attack china




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