भारत के लोग स्वार्थी हैं : चीन




इस बार पेइचिंग सरकार की जगह चीनी मीडिया ने भारत के ऊपर अपना तंज कसा है। चीनी अख़बार ग्लोबल टाइम्स ने कहा,  एनएसजी के मामले में जिस तरह से भारत के लोग,  भारतीय मिडिया ने चीन को इसके लिए उत्तरदायी ठहराया। जो की सरासर गलत है। indian people areselfish 

दरअसल इसमें भारत की अपनी गलती है। ये बात भारत सरकार अच्छी तरह से जानती है की जब तक कोई भी देश एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं करता तबतक उस  देश को एनएसजी की सदस्यता उन्हें नहीं मिलती। indian people areselfish 

अब अमेरिका के सह पर भारत चीन को नीचा दिखाने का  खेल पश्चिमी देशों के साथ मिलकर खेल रहा है। वैसे इस मामले यानि की एनएसजी के मामले में भारत सरकार की शिष्ट आचरण की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा की ये शिष्टता उनकी लाचारी भी है। indian people areselfish 

चीन को सबक सिखाना है : अमेरिका 

अगर वो ऐसा नहीं करेंगे तो आखिर उनके पास रास्ता क्या है ?अखवार कहता है 1975 में एनएसजी की स्थापना हुई तब से लेकर आज तक भारत कहां सोया हुआ ? indian people areselfish 

उन्होंने कहा मिसाइल प्रद्योगिकी नियंत्रण अधिकार में चीन को जगह नहीं मिला और भारत को जगह मिला तो कोई हाय तौबा यहां की जनता में नहीं मची। indian people areselfish 

क्यों मचेगी आखिर चीन में जनता की सरकार है ही कहां। वहां तो दिनरात मानव को मशीन के तरह काम करना पड़ता है। उन्हें किसी प्रकार का अधिकार ही प्राप्त नहीं हैं। indian people areselfish 

पहली बार भारत को एक शक्तिशाली प्रधानमंत्री मिला है indian people areselfish 

विरोध करने पर उन्हें गोलियों से भून दिया जाता है। ऐसे एक नहीं कई उदाहरण आज यहां मौजूद हैं। ग्लोबल टाइम्स  लिखता है की जहां मोदी सरकार इस मामले को लेकर अमेरिका और पश्चिम के देशों को ही सब कुछ मानकर तालियां बटोरने के बाबजूद सभ्य बने रहे।

जबकि भारतीय मिडिया लोगों,  चीन इ समानों का वहिष्कार करने एवं चीन को गाली देने में भी परहेज नहीं किया। बार बार पीठ पर छुड़ा घोंपा हमें हमारे जमीन से बेदखल किया। फिर भी हम हिन्दी चीनी भाई भाई करते रहे। 

चीनी निर्मित घटिया सामान खरीद कर चीन को समृद्ध करते रहे। अब आप ही बताएं लोभी और स्वार्थी है या भारत हाँ पहली बार भारत को एक शक्तिशाली प्रधानमंत्री मिला है। indian people areselfish 

आज उनके खिलाफ कोई जल्दी नहीं बोलता क्योकि वो विश्व के इकलौते ऐसे नेता हैं जिन्हें सबने यहां तक की आपके जिनपिंग ने भी स्वीकारा है।  ये तय है की एशिया में अब चीन की दादागिरी नहीं चलेगी। indian people areselfish




Web Statistics