सिद्धू के सीएम बनने के सपने पर केजरीवाल ने फेरा पानी




अगले वर्ष पांच राज्यों में विधान सभा चुनाव होना है और अब सभी पार्टिया अपने पुरे दम ख़म के साथ मैदान में उतर गई है। इसी क्रम में दल-बदल का शिलशिला भी बढ़ता जा रहा है। वैसे तो छोटे-मोटे कार्यकर्ताओं का दल बदलना आम बात है लेकिन जब पार्टी का दाहिना हाथ ही पार्टी को छोड़ दें तो इससे पता चलता है की हिंदुस्तान के लोकतंत्र में चुनाव कितना अहम् मुद्दा है। kejriwal braked siddhu dream 

ये परंपरा तो बहुत पुरानी है और इसके लिए कानून भी बनाया जा चूका है। फिर भी राजनेता इससे गुरेज नहीं करते है। हाल के घटनाक्रम को देखे तो दो मुख्य नाम जबान पर आता है नवजोत सिंह सिद्धू और मौर्या। ये दोनों ने अपनी पार्टी से त्याग पत्र देकर दूसरी पार्टी को ज्वाइन किया है। मौर्या का तो पार्टी से जाना कोई बड़ी बात नहीं है। इसका मुख्य कारण प्रदेश में मायावती का कद दिन व दिन कम होना है। ऐसी स्थिति में मौर्या का बीजेपी में शामिल होना कोई बड़ी बात नहीं है। kejriwal braked siddhu dream

वही दूसरी तरह सिद्दू का पार्टी से त्याग पत्र देना जोखिम भरा कदम है। जो व्यक्ति कुछ साल पहले केजरीवाल के बारे में टिपण्णी कर लोगों को हंसा हंसा के लोट पोट कर देता है। उस व्यक्ति का आप पार्टी में शामिल होना संशय पैदा करता है। kejriwal braked siddhu dream

केजरीवाल भी वंशवाद के तर्ज पर राजनीति करना चाहते है

यदि आपको याद हो तो सिद्धू का वो जुलमा जिसमें उन्होंने कहा था कि ” केजरीवाल से खुद की खांसी ठीक नहीं होती है और चले है दिल्ली को ठीक करने ” .ये अचानक सा स्नेह सिद्धू के मन में केजरीवाल और आप पार्टी के लिए कैसे आया ? kejriwal braked siddhu dream 

आज 21 वी शताब्दी में जंहा संचार का माध्यम इतना तीव्र है उस एवज में सिद्धू का यु टर्न का राज किसी को पता नहीं हो । ऐसा भला कैसे हो सकता है ? देश की जनता ये जान चुकी है सिद्धू का यह आप प्रेम केवल और केवल पंजाब के सीएम बनने को लेकर है। kejriwal braked siddhu dream 

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शायद सिद्धू केजीरवाल की धूर्त विद्या से पूरी तरह अवगत नहीं है। केजरीवाल गिरिगिट की तरह रंग बदलने में माहिर है। इतनी आसानी से केजरीवाल सीएम का पद सिद्धू को नहीं देने वाले है। सिद्धू ने बीजेपी से खुद को इसलिए किनारा कर लिया ताकि वो पंजाब के सीएम पद का उम्मीदवार बन सके, और इसके लिए सिद्धू ने आप का दमन थाम लिया। kejriwal braked siddhu dream 

अब जबकि सिद्धू ने बीजेपी पार्टी छोड़ दी है तो उम्मीद केवल आप पर टिकी है। सिद्धू के सपने पर पानी तो केजरीवाल ने उस दिन ही फेर दिया था जब केजरीवाल की पत्नी सुनीता आईआरएस से सेवानिवृत हुई थी। केजरीवाल भले ही इस तथ्य को दबाने की कोशिश में है लेकिन वास्तविकता ये है की केजरीवाल भी वंशवाद के तर्ज पर राजनीति करना चाहते है। जैसे लालू यादव की पत्नी 2000 में बिहार की मुख्यमंत्री बनी, ठीक उसी प्रकार केजरीवाल अपनी पत्नी को राजनीति में पदार्पण कराना चाहता है। kejriwal braked siddhu dream

सिद्धू की पत्नी वर्तमान में भी बीजेपी से जुडी हुई है

हालांकि, पंजाब चुनाव के लिए आप पार्टी से मुख्यमंत्री उम्मीदवार की लिस्ट लम्बी है इस दौड़ में कुमार विश्वास, सुनीता केजरीवाल और अन्य कुछ प्रमुख लोग है। इस एवज में केजरीवाल अपने पत्ते खोलने में देरी कर रहे है। वही सिद्दू भी केजरीवाल के गिरगिट रूप में गुमराह हो रहे है। kejriwal braked siddhu dream 

हालांकि, सिद्धू भी मंझे हुये राजनेता है वो भी इस बात को अच्छी तरह से समझते है कि केजरीवाल इतनी आसानी से उनको पंजाब चुनाव में पार्टी का मुख्यमंत्री उम्मीदवार नहीं बनाएगा, इसलिए सिद्धू ने पंजाब चुनाव के लिए अपने सारे दरवाजे को खोल रखा है। सिद्धू की पत्नी वर्तमान में भी बीजेपी से जुडी हुई है। kejriwal braked siddhu dream 

विशेषज्ञों का कहना है कि आप पार्टी सिद्धू को पंजाब चुनाव के लिए मुख्यमंत्री उम्मीदवार नहीं बनाएगी। ऐसे में तो अब एक बात तो साफ हो गया है की सिद्धू के सीएम बनने के सपने पर केजरीवाल ने पानी फेर दिया है। अब देखना ये है की पंजाब में होने वाले आगामी विधान सभा चुनाव में केजरीवाल अब किसे मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनाते है। kejriwal braked siddhu dream  
( प्रवीण कुमार )




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