पद्मा एकादशी के दिन ऐसे करें श्री हरि की पूजा तो बनेंगे सारे बिगड़े काम





हिन्दू धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी को पद्मा एकादशी कहा जाता है। इस वर्ष मंगलवार 13 सितम्बर 2016 को पद्मा एकादशी मनाई जाएगी। इस व्रत को करने से व्रती को सुख, सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस एकादशी को जलझूलनी एकादशी भी कहा जाता है।know padma ekadashi history 

पद्मा एकादशी की कथा know padma ekadashi history 

धार्मिक कथानुासर एक बार की बात है जब राजा इंद्र को दैत्यराज बलि की इच्छा का ज्ञान होता है कि दैत्यराज बलि सौ यज्ञ पूरा करने के पश्चात स्वर्ग को प्राप्त करने में सक्षम हो जाएगा। तदोपरांत स्वर्ग के राजा इंद्र भगवान विष्णु की शरण में जाते है। भगवान विष्णु समस्त देवता गण की सहायता करने का आश्वासन देते है तथा उनको भविष्य में उनके वामन रूप से अवगत कराते है। know padma ekadashi history 

भगवान विष्णु ने कहा की माता अदिति के गर्भ से वामन रूप में मैं अवतार लूंगा। भाद्र माह में शुक्ल पक्ष की द्वादशी को भगवान विष्णु माता अदिति के गर्भ से अवतार लेते है तथा बाल्यकाल से ब्रह्मचारी ब्राह्मण रूप को धारण कर लेते है। know padma ekadashi history 

गौरी पूजा की कथा एवम इतिहास

भगवान विष्णु के वामन रूप का उनके पिता महर्षि कश्यप ने उपनयन संस्कार किया। पिता से आज्ञा लेकर ब्राह्मण वामन राजा बलि के पास नर्मदा के उत्तर-तट पर पहुँचते है जहाँ दैत्यराज बलि अंतिम यज्ञ कर रहे थे।

वामन अवतार भगवान विष्णु, राजा बलि से भिक्षा-याचना करते है। राजा बलि वामन ब्राह्मण को देख उन्हें भिक्षा देने का आशवासन देता है। भगवान वामन उनसे तीन पग भूमि दान में देने की याचना करते है जिसे दैत्यराज बलि शंककराचार्य के विरोध करने के बाबजूद दान में देने का वचन देते है। know padma ekadashi history 

प्रेम से बोलिए भगवान श्री हरि विष्णु जी की जय know padma ekadashi history  

भगवान वामन एक पग में स्वर्ग को, दूसरे पग में पृथ्वी को नाप लेते है। अब तीसरा पग रखने का कोई स्थान नही रह जाता है। इस स्थिति में राजा बलि के समक्ष संकट उतपन्न हो जाता है की ब्राह्मण वामन को तीसरा पैर रखने के लिए स्थान कहाँ से लाये।know padma ekadashi history 

आख़िरकार, अपने कर्तव्यो का पालन करने के लिए राजा बलि अपना मस्तक भगवान के आगे कर देता है। राजा बलि कहता है, हे ब्राह्मण देव तीसरा पग मेरे मस्तक पर रख दीजिये। भगवान वामन ठीक वैसा ही करते है तथा दैत्यराज बलि को पाताल लोक में रहने का आदेश देते है। know padma ekadashi history

परन्तु दैत्यराज बलि की दान तथा भक्ति से प्रभु प्रसन्न होते है। भगवान विष्णु राजा बलि से वर मांगने को कहता है। तत्पश्चात, राजा बलि उनसे साथ में रहने की वचन माँगता है। भगवान विष्णु अपने वचन का पालन करते हुए पाताल लोक में राजा बलि का द्वारपाल बनना स्वीकार करते है।  अधिक जानकारी के लिए क्लिक करें www.hindumythology.org




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