चीन को सबक सिखाना है : अमेरिका




एनएसजी में भारत के सपनों को भले ही चीन ने चकनाचूर कर दिया हो लेकिन अमेरिका के मोदी प्रेम का रिश्ता अब भी बरकरार है। इसी क्रम में अमेरिका के सहयोग और विश्व समुदाय के समर्थन से भारत को कल सर्वसममति से एमटीसीआर का सदस्य बनाया गया। mtcr make indo america relation perfect 

अमेरिका के मोदी प्रेम का नतीजा है कि भारत को एनएसजी समूह से अधिक शक्तिशाली समूह एमटीसीआर का सदस्य बनाया गया। जिसमें कुल 35 सदस्य देश है।हालांकि, चीन इस समूह का सदस्य नहीं है किन्तु चीन ने भी इस समूह का सदस्य बनने के लिए आवेदन कर रखा है। भारत का एनएसजी सदस्य्ता के लिए सोल में हुए बैठक में भारत का विरोध करने वाले चीन की नजर भारत पर रहेगी। mtcr make indo america relation perfect 

चीन को भारत के समर्थन की जरुरत है  mtcr make indo america relation perfect 

समूह सदस्य पहले से चीन के विरोध में है और ऐसे में चीन अब पूरी तरह से भारत पर निर्भर रहने वाला है। इस समूह में सदस्य बनने से भारत मिसाइल निर्यातक देश बन गया है और साथ में अति आधुनिक मिसाइल की भी खरीददारी कर सकता है। mtcr make indo america relation perfect 

भारत के इस समूह के सदस्य बनने से चीन और पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा है क्योंकि एशिया महादेश में भारत एकलौता ऐसा देश है जो अब ड्रोन मिसाइल की खरीददारी के साथ-साथ अब अति आधुनिक मिसाइल की बिक्री भी कर सकता है। mtcr make indo america relation perfect  

भारत ने हाल ही में रूस के सहयोग से ब्रह्मोस मिसाइल का निर्माण किया है। जिसकी खरीददारी के लिए दो साल पूर्व वियतनाम ने भारत से वार्ता की थी किन्तु एमटीसीआर के सदस्य न होने के कारण भारत इस मिसाइल की बिक्री नहीं कर सका था लेकिन अब जबकि भारत एमटीसीआर का पूर्ण रूपेण सदस्य बन गया है तो भारत ब्रह्मोस मिसाइल की बिक्री कर सकता है।वियतनाम के साथ इस सौदे से न केवल पाकिस्तान बल्कि चीन भी परेशान है। अमेरिका दोहरी राजनीति कर चीन पर दबाब बनाने में कामयाब हुआ है। mtcr make indo america relation perfect 

भारत मिसाइल निर्यातक देश बन गया है  mtcr make indo america relation perfect  

भारत का शंघाई समूह का सदस्य बनने के बाद ऐसी उम्मीद थी कि शायद चीन भारत का समर्थन करेगा किन्तु इतिहास साक्षी है कि जब भी कोई समझौता या वार्ता ताशकंद में हुई है वो समझौता या वार्ता भारत के लिए हानिकारक रहा है। फिर चाहे हिंदी-चीनी भाई-भाई पंचशील समझौता हो या फिर भारत -पाकिस्तान ताशकंद समझौता हो। दोनों समय भारत को धोखा ही मिला है और अब संघाई समूह का सदस्य बनना। mtcr make indo america relation perfect 

MTCR से चीन को घेरेगा भारत

हालंकि, वो समय कुछ और था जब चीन और पाकिस्तान ने धोखा देकर हमें नुकसान पहुंचाया था लेकिन वर्तमान में स्थिति बदल चुकी है। मोदी के विश्व पहचान से एशिया प्रान्त के सभी देश सहमे है और इस जद्दोजहज में रहते है कि किसी तरह भारत के साथ सभी स्तर पर बातचीत प्रकिया हो। भारत वर्तमान परिवेश में विश्व का एकलौता देश है जंहा सभी क्षेत्रों में अपार सफलता है। इसीलिए मोदी सरकार ने सभी क्षेत्रों में 50 % विदेशियों को निवेश करने की अनुमति दे दी है। इस परिस्थिति में विदेशी निवेशकों में प्रतिस्प्रधा की होड़ लग गई है। mtcr make indo america relation perfect 

मोदी के विश्व पहचान से एशिया प्रान्त के सभी देश सहमे है mtcr make indo america relation perfect 

चीन भी इस बात से वाकिफ है कि वर्तमान समय में भारत उसका सबसे बड़ा व्यापारिक देश है और वो भारत का पुरे दिल से विरोध नहीं करना चाहता है। चीन के विरोध के दो कारण है पहला एशिया प्रान्त में अपना वर्चस्व बनाने के लिए उसे हर मौके पर भारत का विरोध करना पड़ेगा। जबकि दूसरा कारण पाकिस्तान है क्योंकि आज की तारीख में पाकिस्तान हथियार और परमाणु शक्ति के आलावा अत्य आधुनकि हथियारों का शक्तिशाली और खरीददार देश है। ऐसे में चीन के पास कोई विकल्प नहीं है। mtcr make indo america relation perfect 

मोदी, अमेरिका के सहयोग से सब कुछ बदलने के प्रयास में है और कुछ हद तक मोदी इस प्रयास में सफल भी हुए है। आज चीन ने भले ही भारत का अंत-अंत तक एनएसजी में विरोध किया है लेकिन मोदी और अमेरिका को भरोसा है कि भारत जल्द ही इस समूह का सदस्य बन जाएगा लेकिन चीन के लिए वर्तमान में भारत के सहयोग की अति आवश्यक है क्योंकि एमटीसीआर में सदस्य बनने के लिए चीन को भारत के समर्थन की जरुरत है।  mtcr make indo america relation perfect 

( प्रवीण कुमार )

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