मोदी के डर से नेपाल ने चीन को कहा बाय-बाय




नेपाल में राजनीति संकट में नया मोड़ कल देखने को मिला जब नेपाल के ओली सरकार भारत से सम्बन्ध सुधारने की कोशिश में मधेशी फ्रंट को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है। हाल के दिनों की गतिविधि को देखे तो नेपाल के तेवर भारत के प्रति बदला-बदला सा दिख रहा है। nepal will favour india 

इसका अंदाजा नेपाल के भारत के साथ सम्बन्ध से लगाया जा सकता है, पहले नेपाल के राष्ट्रपति ने भारत के दौरे को रद्द कर दिया और फिर नेपाल के राजदूत को नेपाल ने भारत से वापस बुला लिया। ऐसे में भारत और नेपाल के बीच आपसी सम्बन्ध में बड़ा दरार पैदा हो गया था। nepal will favour india 

अब जबकि नेपाल के इस कदम का प्रति उत्तर मोदी सरकार देने की कोशिश में है तो मौके की नजाकत को भांपते हुए नेपाल के ओली सरकार ने करवट बदल ली है और ” पल में तोला पल में माशा ” नीति अपनाकर भारत को यह बताने की कोशिश कर रहे है कि नेपाल अब भी भारत का सर्वश्रेष्ठ पडोसी मुल्क है। nepal will favour india 

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नेपाल के ओली सरकार का भारत के प्रति नजरिया चीन के प्रलोभन से बदल गया है क्योंकि चीन हमेशा नेपाल को भारत से अधिक सहयोग देने की बात कर नेपाल का भारत के साथ राजनीतिक संबंध बिगड़ना चाहता है और चीन कुछ हद तक इसमें सफल भी हुआ है। किन्तु मोदी अंतर्राष्ट्रीय पहुँच से नेपाल सरकार भी अच्छी तरह से अवगत है। nepal will favour india 

ऐसे में नेपाल भारत के साथ राजनयिक संबंध नहीं बिगाड़ना चाहता है। इसी कारण नेपाल ने चीन को बाई-बाई कह भारत से पुनः दोस्ती का हाथ बढ़ाया है। हालांकि, भारत ने भी दो टूक जबाब देने का मन बना लिया था। nepal will favour india 

नेपाल ने इशारों ही इशारों में चीन को बाय-बाय कह दिया है

आपको बता दें कि नेपाल में मधेशी फ्रंट को लेकर सरकार और मधेशी वर्ग के बीच मतभेद है। इसलिए ओली सरकार ने पहले मधेशी फ्रंट से सीमा अजेंडों को लेकर बातचीत करने को आमंत्रित किया है। भारत ने नेपाल के ओली सरकार से इस मुद्दे को तत्काल इस समस्या का हल निकालने को कहा है। nepal will favour india 

नेपाल पर चीन अपना प्रभुत्व जमाना चाहता है जबकि विपक्ष पार्टी नेपाल के ओली सरकार के चीन के प्रति झुकाव का समर्थन नहीं करती है। वैसे, मोदी के कुशल राजनीति से चीन और नेपाल दोनों अवगत है। ऐसे में चीन खुले तौर पर नेपाल का समर्थन नहीं कर सकता है। nepal will favour india 

जबकि नेपाल आंतरिक तौर पर चीन से ऐसी कोई संधि नहीं करना चाहता है। जिससे कि भारत और नेपाल के सम्बन्ध में गतिरोध आए। ऐसे में नेपाल ने मधेशी फ्रंट को बातचीत के लिए आमंत्रित कर इशारों ही इशारों में चीन को बाई-बाई कह दिया है।  nepal will favour india 




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