स्वामी और मोदी में तकरार




पीएम मोदी की प्रतिक्रिया के बाद बीजेपी के नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने पहली बार सोसल साइट ट्विटर पर ट्वीट कर कहा कि वो प्रचार के पीछे नहीं भागते है बल्कि प्रचार खुद उनके पीछे रहता है। ये सत्य है कि लोगों को ऐसा लगता है कि मैं पब्लिसिटी के लिए ये सब करता हूँ, पर सत्य तो ये है की प्रचार उनके पीछे बेतहाशा भागता रहता है। swami versus jetli controversy 

उन्होंने कहा कि जब मैं अपने घर पर रहता हूँ तो दर्जनों ओवी वैन दरवाजे के बाहर खड़ी रहती है। चैनलों और पैपराजी के सैकड़ो कॉल आते है। जो हर रोज मेरे घर के बाहर झूठी खबरें बनाते रहते है। ताकि मैं उनके उकसावे में आकर कोई प्रतिक्रिया दूंगा। swami versus jetli controversy 

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उन्होंने अपने ट्वीट में पीएम मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि मैं पीएम मोदी के हौसले और कार्य कुशलता की दाद देता हूँ। मैं पीएम मोदी का समर्थक हूँ। मेरे और मोदी के बीच ऐसा कुछ नहीं है जो हमें सफाई देना पड़े।हालांकि, स्वामी ने अपने ट्वीट में लिखा कि कुछ भी हो जाएँ मैं पीएम मोदी के साथ हूँ। कितनी भी आफ़तें आ जाए, स्वामी नमो नमो मोदी के साथ रहेगा। swami versus jetli controversy 

आपको बता दें कि सुब्रमण्यम स्वामी ने रिज़र्व बैंक के गवर्नर की कार्यकुशलता पर संदेह करते हुए कहा था कि राजन थके है इन्हे जल्द अमेरिका भेज दो। स्वामी ने राजन पर तब तक प्रतिक्रिया की जब तक कि राजन ने स्वंय सेवानिवृत होने की बात कर दी।इसके बाद स्वामी ने अरुण जेटली के पहनावे- ओढ़ावे पर प्रश्न चिन्ह लगाते हुए निशाना बनाया था। जिस कारण पार्टी ने उनके इस बयान पर नाखुशी जताई। जबकि पीएम मोदी ने स्वामी के इस आचरण को सिरे से ख़ारिज कर दिया था। swami versus jetli controversy 

प्रचार उनके पीछे बेतहाशा भागता रहता है  swami versus jetli controversy 

दअरसल, पीएम मोदी ने पहली बार अपने दो साल के कार्यकाल में एक प्राइवेट न्यूज़ चैनल को इंटरव्यू दिया था। जिसमें उनसे सुब्रमण्यम स्वामी के बयान को लेकर प्रश्न किया गया था।

जिसके उत्तर में पीएम मोदी ने कहा था कि पार्टी में यदि कोई व्यक्ति इस तरह की गतिविधि में लिप्त है अथवा प्रचार के लिए इस तह का बयान देता है तो वो गलत है।मैं कड़े शब्दों में इस तरह के बयान की निंदा करता हूँ। पार्टी में आचार संहिता है जिसके अनुरुप ही सबको चलना होता है। यदि कोई पार्टी के आचार संहिता का उलंघ्घन करता है तो पार्टी को उस व्यक्ति पर पुनर्विचार करना होगा। swami versus jetli controversy

हालांकि, मीडिया चैनल ने ये प्रश्न पीएम मोदी से सुब्रमण्यम स्वामी पर किया किन्तु पीएम मोदी ने पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं के लिए ये दिशा निर्देश तय किया था। अब जबकि मीडिया ने पीएम मोदी के इस उत्तर का केंद्र केवल सुब्रमण्यम स्वामी पर किया है। तो अब स्वामी ने इसे अपने व्यक्तित्व राजनीति से जोड़कर प्रतिक्रिया दी है।

सुब्रमण्यम स्वामी एक कुशल और परिपक्व राजनेता है  swami versus jetli controversy

सुब्रमण्यम स्वामी एक कुशल और परिपक्व राजनेता है और उन्होंने पिछले चार दशक से देश की सेवा की है। उनके व्यक्तित्व जीवन में देशभक्ति की धारा भी जुड़ती है। आज की तारीख में स्वामी हिन्दू, हिन्दुस्तान और हिंदी के विकास, उत्थान के लिए प्रतिबद्ध है। ये बात पीएम मोदी भी जानते है। swami versus jetli controversy

देश के सर्वोसर्वा होने के नाते पीएम मोदी हिंदुत्व के विषय पर अपने विचार प्रस्तुत नहीं कर पाते है। शायद, इसीलिए पार्टी ने स्वामी को ये कार्य सौंपा है। जिसे वो बखूबी निभा रहे है। आज यदि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण होता है तो वो कार्य केवल स्वामी जी के हाथों से हो पाएगा। स्वामी स्वंय बहुमुखी प्रतिभा के धनी है। अतः ये बात उन्हें बताने की जरुरत नहीं है कि उन्हें वक्त के नजाकत के साथ कैसे चला जाए।  swami versus jetli controversy
( प्रवीण कुमार )



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