इस्लाम के नाम पर मुस्लिम महिलाओं पर होता है अत्याचार




समान नागरिक संहिता क़ानून को लेकर सारे देश में एकबार फिर जोड़दार बहस छिड़ चुकी है। केंद्र में जब से मोदी की सरकार ने अपनी बागडोर सम्हाली है, तब ठंडे वस्ते में पड़े अनेक व्यवस्थओं को लागू करने की योजना शुरू हुई। Uniform Civil Code

इन्ही योजनाओं में समान नागरिक संहिता बीजेपी और आरएसएस की एक महत्तवाकांक्षी मामला है। इस मामले की शुरुआत मुश्लिम धर्म के उस मामले से शुरू हुआ, जिसमें की उनके तीन बार तालाक तालाक कह देने मात्र से वैवाहिक संबंध खत्म हो जाता है। Uniform Civil Code

इस मामले को लेकर इस देश के लोगों का कहना है, मामले में मुश्लिम समुदाय के लोग महिलाओं पर एक तरह से अत्याचार करते हैं। जोकि बंद होना चाहिए।

1997-98 में जब ये मामला कोर्ट पहुंचा . इसपर कोई खास काम नहीं हो सका। अब एक बार फिर से केंद्र सरकार ने इसे न्यायपालिका के पास भेजा है। मोदी सरकार ने विधि व्यवस्था को इसपर गौर करने के लिए कहा है। Uniform Civil Code

मजहब के अधीन महिलाओं पर अत्याचार करता आया है Uniform Civil Code

बीजेपी एवं संघ के एक साथ होने के कारण अल्पसंख्यक इसे अपना विरोध मान रहे हैं। वो बेमतलब अपनी लकीर की फकीर वाली दादा गिरी कर रहा है। देश के प्रसिद्द कैथोलिक चर्च सायरा -मालावार ने इसे राष्ट्र में एकता और मजबूती लाने वाला बिल बताया है। Uniform Civil Code

वही मुसलमानों ने साफ़ तौर पर इसका विरोध किया है। उनका कहना है कि इस्लाम धर्म समान नागरिक सहिंता का विरोध करती है।

सैकड़ों मुसलमानों की निर्मम हत्या

मुस्लिम सम्प्रदाय का मानना सत्ताधारी पार्टी की ये सोची समझी साजिस है। इससे अल्पसंख्यकों को अपना अधिकार खोना पड़ेगा। इसलिए हम अपने समुदाय के हक को किसी भी कीमत पर छीनने नहीं देंगे। इस मुद्दों को हम राष्ट्रिय स्तर पर ले जाएंगे। Uniform Civil Code

मुस्लिम सम्प्रदाय अपने हितों के लिए इस कानून से बचना चाहते है। जबकि हकीकत ये है कि मुसलमान अपने मजहब के अधीन महिलाओं पर अत्याचार करता आया है। इस संदर्भ में मुस्लिम महिलाएं ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।ऐसे में देश की एकता, अखंडता और सभी वर्गो को समान अधिकार देने के लिए समान नागरिक सहिंता का लागु होना परम आवशयक है। Uniform Civil Code
( हरि शंकर तिवारी )



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