आरबीआई जून में कड़े कदम उठाएगा


नई दिल्ली –

जिस प्रकार से 2019 की राजकोषीय घाटा बढ़ा है इससे यह माना जा रहा है कि जून के ब्याज दरों में कटौती कर सकता है। औद्योगिक संगठनों की मांग है कि आरबीआई को आम आदमी का भी पूरा ख्याल रखना चाहिए। और रेपो रेट में कटौती को टाल दें। क्योंकि ऐसा माना जा रहा है कि जिस प्रकार से वैश्विक विकास का धीमा ग्रोथ और मुद्रास्फीति के आरबीआई के लक्ष्य से नीचे रहा इससे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि आरबीआई रेपो रेट में कटौती करेगा। ताकि पूर्र वर्ष फिर कटौती की संभावना न रहे। औद्योगिक संगठन ने कहा है कि आरबीआई इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि मौद्रिक नीति पर थोड़ी ढिलाई हो। क्योंकि इसका पूरे अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ता है। गौरतलब है कि आरबीआई ने फरवरी और अप्रैल महीने के दौरान रेपो रेट में 25-25 बेसिस प्वाइंट की कटौती की थी। अगर जून में कटौती हो जाती है तो पूरे वर्ष आरबीआई कटौती करने से बच जाएगा लेकिन अभी क्या कदम आरबीआई उठाती है इसपर देश भर के औद्योगिक संगठन की नजर है। गौरतलब है कि जिस प्रकार से अभी चुनाव हो रहे हैं इससे भी राजकोषीय खर्च बढ़ा है इससे यह तो तय है कि मौद्रिक नीति को कड़े करेगा आरबीआई। आरबीआई के चालू वित्त वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही में आरबीआई की मौद्रीक नीतियों और कर्ज देने के नियमों में ढील दिए जाने के कारण आर्थिक वृद्धि को सहारा मिला है।

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