अमरनाथ की तीर्थयात्रा मुसलमानों के बिना अधूरी है!

हिमालय पर स्थित पवित्र तीर्थ स्थल अमरनाथ के दर्शन के लिए लोगों ने अभी से जाना शुरु कर दिया है. हर तरफ बम भोले के जयकारे लग रहे हैं. यह यात्रा धार्मिक भाईचारे का प्रतीक माना जाता है. जहां अक्सर पालकी पर शिव के भक्त होते हैं और पालकी वाला मुसलमान होता है. वहीं कई बार शिवभक्त बाबा के द्वार तक पहुंचने के लिए खच्चर से जाते हैं और इसे संभालने वाले भी कोई मुसलमान ही होते हैं. amarnath yatra

दरअसल, ये पवित्र गुफा दक्षिण कश्मीर हिमालय में 3880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. यात्रा जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के 36 किलोमीटर लंबे पारंपरिक पहलगाम मार्ग और गांदेरबल जिले के 14 किलोमीटर लंबे बालटाल मार्ग से होते हुवे पहलगाम से चंदनवारी, पिस्सु टॉप, शेषनाग, पंचतरणी होते हुए पवित्र गुफा पहुंचते हैं. amarnath yatra

आज सुबह की ताज़ा ख़बरें | 2nd July 2019

आपको बता दें कि यहां अब तक देशभर से करीब डेढ़ लाख श्रद्धालु 46 दिन चलने वाली इस यात्रा के लिए पंजीकरण करा चुके हैं. पिछले साल 2.85 लाख तीर्थयात्रियों ने अमरनाथ के दर्शन किए थे, जबकि 2015 में तीर्थयात्रियों की संख्या 3.52 लाख, 2016 में 3.20 लाख और 2017 में 2.60 लाख थी.

अमरनाथ गुफा हिंदुओं के प्रमुख तीर्थस्‍थलों में से एक है. मान्यता है कि गुफा में बर्फ का शिवलिंग है. इसलिए इसे बाबा बर्फानी भी कहते हैं. इसे ‘अमरेश्वर’ भी कहा जाता था.

आपको बता दें कि आतंकवादी खतरों को देखते हुए अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा के लिए इस बार खास इंतजाम किये गए हैं. कई स्तरों में सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है. इसके अलावा सीआरपीएफ कर्मियों का एक विशेष मोटरसाइकिल दस्ता भी शामिल है, जो काफिलों के साथ चल रहा है, उनके हेलमेट पर कैमरे लगे हैं. अगर आप अमरनाथ दर्शन करने की सोच रहें हैं तो आपके लिए एक सुनहरा मौका है. जरूर जाए..! amarnath yatra

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