कल मनाया जाएगा कोकिला व्रत, जानिए व्रत की कथा एवं इतिहास

वेदों, पुराणों एवं शास्त्रों के अनुसार जब मलमास आषाढ़ माह में आता है तो इसे कोकिला अधिक मास कहते है। हिन्दू धर्म में कोकिला अधिकमास का विशेष महत्व है। इस व्रत को विशेष कर कुमारी कन्या सुयोग्य पति की कामना के लिए करती है। इस वर्ष कोकिला व्रत कल यानि 16 जुलाई 2019 को मनाया जाएगा। इस व्रत के प्रभाव से व्रती को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। kokila vrat

पौराणिक कथानुसार जब देवो के राजा दक्ष की बेटी सती अपने पिता के अनुमति के खिलाफ भगवान शिव जी से विवाह कर लेती है। जिस कारण राजा दक्ष बेटी सती से नाराज हो जाते है। राजा दक्ष भगवान शिव जी के रहन-सहन से घृणा करते थे। kokila vrat

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उनको भगवान शिव जी पसंद नहीं थे। इसी कारण राजा दक्ष बेटी सती से सभी सम्बन्ध तोड़ लेते है। एक बार राजा दक्ष ने बहुत बड़ा यज्ञ किया जिसमें सभी देव गण एवम देवी को आमंत्रित किया लेकिन भगवान शिव जी और देवी सती को इस यज्ञ में आमंत्रित नही किया गया।

भगवान शिव जी माँ सती को बिना बुलाये ना जाने को कहते है। किन्तु माँ सती उस यज्ञ में शामिल होने अपने पिता के घर पर पहुंच जाती है। इस यज्ञ में माँ सती तथा भगवान शिव जी को अपमानित किया जाता है। इस कारण माँ सती क्रोध में आकर यज्ञ कुण्ड में अपने शरीर का त्याग कर देती है।

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