कैसे रखें बदलते मौसम में दमा रोगियों को सुरक्षित

राजधानी दिल्ली सहित पूरे भारत में मानसून अपना दस्तक दे दिया है. आपको बता दें कि, बारिश एक ऐसा सीजन है जिसे सभी लोगों को बेसब्री से इंतजार रहता है. वहीं दूसरी तरफ इस मौसम में अस्थमा यानी दमे के अटैक की आशंका बढ़ जाती है. हालांकि, थोड़ा सा परहेज और थोड़ी सी सावधानी से बदलते मौसम में दमा रोग से बचाव किया जा सकता है.

दरअसल, इस संबंध में डाक्टरों का कहना है, ‘इस समय वातावरण में अचानक पोलेन ग्रेन का ज्यादा फैलाव हो जाता है. इसके अलावा, बढ़ी हुई उमस के कारण फंगस में भी वृद्धि हो जाती है. इससे दमा के अटैक की घटनाएं बढ़ जाती हैं. बारिश के कारण सल्फर डाइऑक्साइड तथा नाइट्रोजन डाइऑक्साइड जैसे घुले हुए रसायनों की मौजूदगी से वायु प्रदूषण के लेवल में वृद्धि हो जाती है, जो दमा रोगियों के लिए घातक है. मॉनसून में कुछ वायरल इन्फेक्शन भी बढ़ जाते हैं, जिससे दमा की प्रॉब्लम बढ़ जाती है.

कर्नाटक : फिर संकट में कांग्रेस – जेडीएस सरकार ?

बारिश में कैसे करे दमा रोग को नियंत्रित

कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखकर दमा के रोग को नियंत्रण में रखा जा सकता है. दमा की दवा का नियमित सेवन करना चाहिए. एक ताजा स्टडीज से पता चला है कि नियमित रूप से दवाओं के सेवन से दमा का खतरा कम हो जाता है. यदि डॉक्टर ने दमा की दवा रोज खाने को कहा हो, तो इस सलाह पर अमल जरूरी है.

इस के अलावा बारिश के मौसम इन बातों को रखें ध्यान…..

  • बाथरूम की नियमित रूप से सफाई करें और इसमें ऐसे प्रॉडक्ट्स का इस्तेमाल करें, जो बैक्टीरिया को खत्म करने में सक्षम हों.
  • एक्जॉस्ट फैन का उपयोग करें और घर में नमी न रहने दें. साथ कि अपने पौधों को बेडरूम से बाहर रखें.
  • दिखाई देने वाले फंगल को साफ करें और ब्लीच तथा डिटर्जेंट जैसे पदार्थों से युक्त क्लीनिंग सोल्युशंस का उपयोग करें.
  • ह्यूमिड या तेज हवा वाले दिन अंदर रहें, क्योंकि इस दिन पॉलेन ग्रेन की मात्रा वातावरण में काफी हाई होती है.
  • अपने बेड को सप्ताह में एक बार गर्म पानी से धोएं.
  • भीगे कपड़े से फर्श के धूल को साफ करें और साथ ही लैंपशेड्स तथा विंडोंसिल्स की भी सफाई करें.
  • ऐसे फ्रेंड्स और रिश्तेदारेां के यहां लंबे समय तक न रहें, जिनके पास पालतू जानवर हैं. यदि आप वहां जाते हैं तो यह तय कर लें कि दमा या एलर्जी की दवाएं आपके साथ हों.
  • दमा के रोगी लाइट फूड का सेवन करें. हैवी फूड खाने से आपको सांस लेने में दिक्कत हो सकती है.
गर्मी में शरीर को निरोग कैसे बनायें | How to make Health in Summer

इसके अलावा अस्थमा के मरीज को खुली और फ्रेश हवा में ज्यादा से ज्यादा वक्त बिताना चाहिए. फ्रेश और साफ पानी का भी भरपूर इस्तेमाल करना चाहिए. हफ्ते में एक बार फास्ट रखना भी आपके लिए बेहद फायदेमंद होगा. अतः इस प्रकार इन सब बातों पर अमल कल मरीजों को ख्याल रखा जा सकता है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *