त्रिस्तरीय जीएसटी लगाएं वित्त मंत्री : कैट

कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को भेजे एक पत्र में सुझाव दिया है की अनेक स्तरों पर जीएसटी लगने के बजाय केवल तीन स्तरों पर ही जीएसटी लगाया जाए और उपभोक्ता के सामान लेते समय जीएसटी की राशि माल की कीमत में शामिल हो और उपभोक्ता से किसी भी अन्य रूप में कर न लिया जाए।CAT said FM find the three-tier GST 

एनआरएलएम: भ्रष्टाचार का बोलबाला, गरीबों के पैसे डकार रहे अधिकारी

कैट ने कहा है की सरकार द्वारा जीएसटी को अधिक सरलीकृत बनाने के प्रयास स्वागतयोग्य हैं किन्तु इस एवज में जीएसटी से प्राप्त होने वाले कुल संग्रह में गिरावट चिंता का विषय है। इस दृष्टि से कुछ ऐसे कदम उठाये जाने बहुत जरूरी हैं जिससे व्यापारियों को कर संग्रह में सुविधा हो और सरकार का राजस्व लक्ष्य से अधिक संगृहीत हो।

कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने जेटली को भेजे पत्र में कहा है की वास्तव में सामान्य रूप से उपभोक्ता अलग से कर देने में कतराता है और माल लेते समय कर की दर की अधिकता को देखते हुए व्यापारी से बिल नहीं लेता जिसके कारण बड़ी संख्या में देश भर में बिक्री रिकॉर्ड पर नहीं आती है जिससे सरकार को राजस्व का नुक्सान होता है और अक्सर व्यापारियों को कर वंचना के लिए दोषी ठहराया जाता है जबकि व्यापारियों का कोई दोष नहीं होता। सामन खरीदते समय उपभोक्ता द्वारा बिल न लिए जाना राजस्व में गिरावट का एक बहुत बड़ा कारण है।

राम भक्तों को फिर मिली तारीख

खंडलवाल ने इस प्रवृति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा की ऐसी कर प्रणाली विकसित करनी चाहिए जिसमें उपभोक्ता पर कर का भार अलग से न पड़े और वो सामान लेते समय बिल लेने से न कतराएं।

50 लाख रुपये से अधिक के निर्माण पर एसजीएसटी
इस सन्दर्भ में भरतिया एवं खंडेलवाल ने सुझाव दिया है की जीएसटी को विभिन्न स्तरों की बजाय केवल तीन स्तरों पर ही लगाया जाए जिसमें पहला दो राज्यों के बीच हुई खरीद बिक्री पर आईजीएसटी, दूसरा किसी भी राज्य में हुई पहली बिक्री पर एसजीएसटी एवं सीजीएसटी तथा उसके बाद सप्लाई चेन में किसी भी स्तर पर जीएसटी न लगाया जाए बल्कि उसके बाद उपभोक्ता तक पहुँचने तक जीएसटी की राशि सामान की कीमत में ही शामिल रहे तथा तीसरा किसी भी राज्य में वार्षिक 50 लाख रुपये से अधिक के निर्माण या उत्पादन पर एसजीएसटी तथा सीजीएसटी लगाया जाए।

कैट ने कहा की जब उपभोक्ताओं को टैक्स पेड सामान मिलेगा और उसे अलग से कोई कर नहीं देना पड़ेगा तब वो निश्चित रूप से सामान लेते समय में बिल अवश्य लेगा। इससे बड़ी संख्या में जो बिक्री अभी रिकॉर्ड में नहीं आती है वो रिकॉर्ड में दर्ज़ होगी और सरकारों का राजस्व काफी मात्रा में बढ़ेगा। यह उल्लेखनीय है की राज्य के अंदर व्यापार करने वाले लोगों द्वारा विभिन्न चरणों में की गई खरीद एवं बिक्री पर वैल्यू एडिशन बेहद नाम मात्र का होता है जिसके कारण सरकार को मात्र 1 से 2 प्रतिशत राजस्व की हानि होगी जबकि प्रथम बिक्री पर जीएसटी लगने से लगभग 10 से 15 प्रतिशत राजस्व का इजाफा होगा और कर वंचना की सम्भावना भी न के बराबर होगी।

भरतिया एवं खंडेलवाल ने कहा की यदि सरकार द्वारा यह कदम उठाया जाता है तो एक तरफ जीएसटी में पंजीकृत लोगों की संख्या करोड़ों से घट कर लाखों में रह जायेगी जबकि दूसरी ओर सरकार के राजस्व में बेहतर बढ़ोतरी होगी और सरकार के लिए कर प्रणाली को आसान रूप से लागू करने में सुविधा होगी वहीँ दूसरी ओर जीएसटी पोर्टल का बोझा भी बड़ी मात्रा में काम होगा और उसके अक्सर बजाते रहने के आसार काम होंगे। जहाँ तक राज्यों के बीच कर संग्रह के बंटवारे का सवाल है तो वित्त आयोग उसके लिए कोई तार्किक फार्मूला विकसित कर सकता है जिससे किसी भी राज्य को राजस्व का नुक्सान न हो जबकि केंद्र सरकार को दोनों स्तरों पर होने वाली बिक्री में राजस्व मिलेगा ! इस व्यवस्था से बड़ी संख्या में देश भर के व्यापारी कर प्रणाली के दुष्चक्र से मुक्ति पा सकेंगे और उपभोक्ता भी ख़ुशी ख़ुशी बिल लेगा और अप्रत्यक्ष रूप से कर देगा।

 व्यापारियों को टैक्स कलेक्टर का दर्जा दिया जाए
खंडेलवाल ने यह भी सुझाव दिया की जीएसटी प्रणाली के अंतर्गत व्यापारियों को टैक्स कलेक्टर का दर्जा दिया जाए और अधिक टैक्स एकत्र करने पर रिवॉर्ड और अन्य स्कीम के अंतर्गत पुरस्कृत किये जाएँ वहीँ दूसरी ओर कर प्रणाली के बेहतर पालना और अधिक से अधिक राजस्व एकत्र करने हेतु प्रोत्साहित करने के लिए व्यापारियों को कर एकत्र करने में डिस्काउंट दिया जाए।CAT said FM find the three-tier GST 

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.