मेरा हिन्दुस्तान से रिश्ता




मेरा हिन्दुस्तान सेरिश्ता । hindustan relationship poem

जिस्म का जैसे जानसे रिश्ता।।

तन-मन धन से बड़ा तिरंगा ।

जिसका है स्वाभिमानसे रिश्ता।।

मानवता का मोल नहींपर

मेरा हर इनसान से रिश्ता।।……… hindustan relationship poem

पर्यावरण भी रोजक्षीण हो रहा ।

अब नहीं रहा ईमान सेरिश्ता ।।

अब तो औरत रोज लुटरही।

रहा नहीं रहमान सेरिश्ता।।

लाल आजादी सही मेंहोगा ।

कायम रहे अनजान सेरिश्ता।। hindustan relationship poem

मेरी ख्वाहिश आज भीहै ।

जमीं का हो आसमान सेरिश्ता।।…….

भोजपुरी गीत-तिरंगा

गीत –लाल बिहारीलाल*

झूके ना देब अब तिरंगा के शान hindustan relationship poem

लेवे या देवे परे केतनों के जान

झूके ना देब अब तिरंगा के शान

त्याग तपस्या के ई अजब कहानी बा

आन बान शान के ई परम निशानी बा

जनता जनारदन की ई हे बा पहचान

झूके ना देब अब तिरंगा के शान

सहब ना अब हम पड़ोसी के नाखरा hindustan relationship poem

होय ना देब आपन माटी के बाखरा

हमके त बा ई देश पर गुमान

झूके ना देब अब तिरंगा के शान

गिदर के भभकी अब काम ना आई

मुँह में राम बगल में छूरी चल ना पाई

ईंट के पत्थर से होई समाधान hindustan relationship poem

झूके ना देब अब तिरंगा के शान

शहीदों के शत-शत नमन हमार वा

आजादी के पावन ई परब-त्योहार बा

लाल न्योछावर करी आपन जान

*सचिव लाल कला मंच,नई दिल्ली-44 hindustan relationship poem

2.

गीत- आजादी का जश्न मनाये

*लालबिहारी लाल

आजादी का जश्न मनायें,

आओं मिकर हम और आप

इसे अच्छून बनाये आज,

आओं मिलकर हम और आप hindustan relationship poem




आजादी काजश्न मनायें…………….

कहीं गोलाकहीं बम चले थें

कितनों के हीदम निकले थे

जब जाँ संगहुये आजाद,हम और आप

आजादी काजश्न मनायें…………….

नियम कानूनसब ध्वस्त हो गये

जो जागे थेवो भी सो गये

जन-जन संग जलरहे थे,हम और आप

आजादी काजश्न मनायें…………….

कहां जा रहादेश सोचें हम

लूट खसोट कोकरे ध्वस्त हम

जूश्यों केलिये बोयें कांट,हम और आप

आजादी काजश्न मनायें……………. hindustan relationship poem

कब तक यूँखामोश रहेगे

दुस्मन को बीकुछ न कहेगे

लाल संगअंगारे उगले हम और आप

आजादी काजश्न मनायें…………….

* सचिव लालकला मंच,नई दिल्ली

तीन मुक्तक-

लाल बिहारी लाल,नई दिल्ली hindustan relationship poem

1.

सचमुच अब देखों देश बदल रहा है

बी.ए. पास रामू पकौड़ा तल रहा है

लाल अजब यहां वोट की राजनीति

जातवाद की आग में देश जल रहा है hindustan relationship poem

2.

सचमुच अब देखों देश बदल रहा है

घर घर में चारोओर कंस पल रहा है

लाल अजब है यहां कायदा कानून

भार जिसके कंधो पर वही छल रहा है hindustan relationship poem

जानिए आजादी के बाद भी आज भी लोग क्यों जी रहे है गुलामों की जिंदगी

3.

सचमुच अब देखों देश बदल रहा है

गलियों की नाली से गैस जल रहा है

फेंकने की सीमा अब तय हो लाल

देख के हालात मेरा जी मचल रहा है hindustan relationship poem

लाल बिहारी लाल )

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