पुण्यतिथि पर याद आए मिसाइल मैन..

देश भर में मिसाइल मैन नाम से प्रसिध्द डॉ APJ अब्दुल कलाम को देश हमेशा याद रखेगा. डॉ कलाम ने अपने जीवन के अंतिम क्षंण तक देश के लिए काम करते रहे. आज उनकी पुण्यतिथि है. आज से 4 साल पहले 27 जुलाई को उनका निधन मेघालय के शिलांग में हो गया था. यहां वो लेक्चर देने गए थे. कलाम ने अपने आखिरी कुछ घंटे ऐसे बिताए जो यादगार है. डॉ अब्दुल कलाम IIM शिलॉन्ग में लेक्चर दे रहे थे तभी उन्हें अचानक दिल का दौरा पड़ा. उसके बाद उन्हे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर ने कुछ नहीं कर सके. 83 वर्ष के डॉ कलाम साहब इस दुनिया से विदा ले चुके थे. APJ Abdul Kalam Biography Death

बता दें कि, APJ अब्दुल कलाम का पूरा नाम अवुल पकिर जैनुल्लाब्दीन अब्दुल कलाम था. वे एक गरीब परिवार से थे, इसके अलावा एक मछुआरे के बेटे भी थे. वो अपनी शुरुआती जीवन में अखबार बेचा करते थे. डॉ कलाम साहब को बच्चों से काफी लगाव था. 8 साल की उम्र से ही डॉ कलाम सुबह 4 बजे उठते थे. उसके बाद सुबह फजर का नमाज अदा कर वहां से गणित पढ़ने निकल पड़ते थे. ट्यूशन से आने के बाद सुबह आठ बजे तक रामेश्वरम रेलवे स्टेशन पर न्यूज पेपर बांटते थे.

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कलाम ‘एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी’ में आने के पीछे अपनी पांचवी क्लास के शिक्षक सुब्रह्मण्यम अय्यर को कारण बताते हैं. वो कहते हैं, ‘वो हमारे अच्छे शिक्षक में से एक थे. एक बार उन्होंने क्लास में पूछा कि चिड़िया कैसे उड़ती है? क्लास के किसी छात्र ने इसका उत्तर नहीं दे सका तो अगले दिन वो सभी बच्चों को समुद्र के किनारे ले गए. वहां कई पक्षी उड़ रहे थे. कुछ समुद्र के किनारे उतर रहे थे तो कुछ बैठे थे.

वहां उन्होंने हमें पक्षी के उड़ने के पीछे के कारण को बताया साथ ही पक्षियों के शरीर की बनावट को भी विस्तार पूर्वक बताया जिसके कारण पक्षी उड़ सकते हैं. उनके द्वारा बताई गई ये बातें मेरे अंदर इस कदर समा गई कि मुझे हमेशा महसूस होने लगा कि मैं रामेश्वरम के समुद्र तट पर बैठा हूं और उस दिन की घटना ने मुझे जिंदगी का लक्ष्य निर्धारित करने की प्रेरणा दी. बाद में मैंने तय किया कि उड़ान की दिशा में ही अपना लक्ष्य रखूगां. मैंने बाद में फिजिक्स की पढ़ाई की और मद्रास इंजीनियरिंग कॉलेज से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में पढ़ाई पूरा किया. APJ Abdul Kalam Biography Death

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इसके बाद सन 1962 ई में कलाम साहब ISRO में पहुंचे. इन्हीं के प्रोजेक्ट डायरेक्टर रहते भारत ने अपना पहला स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान एसएलवी-3 बनाया. 1980 में रोहिणी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा के समीप स्थापित किया गया और भारत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष क्लब का सदस्य बन गया. डॉ कलाम ने इसके बाद स्वदेशी गाइडेड मिसाइल को डिजाइन किया. इसके बाद उन्होंने अग्नि और पृथ्वी जैसी मिसाइलें भारतीय तकनीक बनाने में सफल रहे. APJ Abdul Kalam Biography Death

इसके बाद सन 1992 से 1999 ई तक कलाम रक्षा मंत्री के रक्षा सलाहकार भी रहे. इस दौरान वाजपेयी सरकार ने पोखरण में दूसरी बार न्यूक्लियर टेस्ट भी किए और भारत परमाणु हथियार बनाने वाले देशों में शामिल हो गया. कलाम को 1981 में भारत सरकार ने पद्म भूषण और फिर 1990 में पद्म विभूषण और 1997 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न प्रदान किया. भारत के सर्वोच्च पद पर नियुक्ति से पहले भारत रत्न पाने वाले कलाम देश के केवल तीसरे राष्ट्रपति हैं.

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