समंदर में डूबी नाव लेकिन चार दिन बाद निकला जिंदा

कहते हैं कि “मंजिलें उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से क्य़ा होता है हौसलों से उड़ान होती है” यह शायरी अकसर विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए कही जाती है लेकिन यह बात आज भारतीय मछुआरे रवींद्रदास पर बिल्कुल सटीक बैठ रही है. रवींद्र के बुलंद हौसले के सामने समुद्री तूफान भी झुक गया. अगर इसे दूसरे शब्दों में कहा जाय तो जिंदगी जीने का जुनून जिद से भरा हो तो मुश्किलें भी आसान हो जाती हैं. bay of Bengal fishermen

दरअसल बीते दिनों पश्चिम बंगाल के काकद्वीप से रवींद्रदास और 25 भारतीय मछुआरे मौसम विभाग की तूफान की चेतावनी को दरकिनार करते हुए समुद्र में मछली पकड़ने के लिए अपनी नावों के साथ उतरते हैं लेकिन इसी बीच समुद्री तूफान में उनकी नांव फंसकर पलट जाती है. जिसके बाद सभी लापता हो जाते हैं लेकिन 4 दिन बाद रवींद्रदास को बांग्लादेश के चटगांव पोर्ट से बचाया जाता है. लेकिन इन चार दिनों तक वह तमाम समुद्री झंझावातों का सामना करते हुए सकुशल जिंदा वापस लौटते हैं. bay of Bengal fishermen

सरकारी कोशिशों के बावजूद घर नहीं खरीद पा रहे लोग, 4 साल में स्थिति हुई बदतर

इतने दिनों तक समुद्री झझावातों का सामना करने के बावजूद जिंदा बचने की उनकी इच्छाशक्ति ने सभी को हैरान कर दिया है. लेकिन इसके साथ ही अब उन बाकी के मछुआरों के परिवारों को एक आशा जगी है कि शायद बाकी के लोग भी जिंदा बच जाएं. बता दें कि पश्म बंगाल के काकद्वीप से चटगांव की दूरी करीब 600 किलोमीटर है और रवींद्र चार दिनों में काकद्वीप से बहकर वह चटगांव पहुंचे थे.

गौरतलब है कि इसी तरह की घटना कुछ साल पहले थाईलैण्ड के एक मछुआरे के साथ घटी थी जब वह मछली पकड़ने के इरादे से हिंद महासागर में गया था लेकिन गलती से वह कुछ ज्यादा ही अंदर चला गया और समुद्री लहरों की चपेट में आने से नांव टूट गई. ऐसे में जब उसे अपनी जान बचाने का कोई उपाय नहीं सूझा तो उसने मछली रखने के लिए अपने साथ ले गए स्टाइरोन के बाक्स में खुद को बंद कर लिया.

एप्पल साइडर विनेगर के फायदे जानकर हैरान रह जायेंगे

इसे भगवान का करिश्मा ही कहेंगे कि 28 दिनों के बाद वह व्यक्ति बाक्स के साथ तैरते हुए ऑस्ट्रलिया जा पहुंचा जहां ऑस्ट्रेलियाई तटरक्षक बलों ने इसे एक संदिग्ध बाक्स के रूप में देखा और उसे समंदर से बाहर निकाला. जिसके बाद जब उन्होंने बाक्स खोला तो उसके अंदर से वह व्यक्ति जिंदा हालत में निकला. bay of Bengal fishermen

हालांकि 28 दिनों से बिना कुछ खाए पिए बाक्स में पड़े रहने के काऱण उसका शरीर पूरी तरह से जाम हो गया था. बाद में उसे चिकित्सा सेवाओं के द्वारा बचाया गया. ऐसे में इस तरह के लोगों पर यह कहावत बिल्कुल सटीक बैठती है कि “जाको राखे सांइयां मार सके ना कोय, बाल न बाकां कर सके जो जग बैरी होय.”

-कुलदीप सिंह

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *