विपक्ष के सेकुलरिज्म पर भारी रहा भगवा

लोकसभा चुनाव 2019 का चुनावी रिजल्ट आ गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व एनडीए ने 2014 से भी बड़ी ऐतहासिक जीत दर्ज किया है. भाजपा 2019 में लोकसभा का चुनाव जीतेगी और मोदी फिर से प्रधानमंत्री बनेगे, इसकी घोषणा तो सभी चुनावी राजनीतिक पंडित कर रहे थे लेकिन भाजपा को इस तरह का प्रचंड बहुमत मिलेगा ऐसा किसी ने नहीं सोचा था. हालांकि इस चुनाव में एनडीए ने सेकुलरिज्म के नाम पर जाति-धर्म की राजनीति करने और समाज को आपस में बांटकर राजनीति की रोटियां सेकने वाले विपक्षी दलों को पूरी तरह से पछाड़ते हुए बड़ी जीत दर्ज किया है.

इस चुनाव जहां भाजपा ने अपने दम पर अकेले 303 सीटें जीती तो वहीं सहयोगी दलों के साथ मिलकर एनडीए ने 352 सीटों पर प्रचंड जीत हासिल कर सत्ता में वापसी किया है. इस बार खास बात यह रही कि 5 महीने पहले हिंदी हार्ट लैण्ड कहे जाने वाले जिन तीन राज्यों राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा था वहां पार्टी ने 99 फीसदी सीटों पर लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज किया है. इसके साथ ही भाजपा ने देशभर की 8 लोकसभा सीटों पर 100 फीसदी क्लीन स्वीप किया हैं.

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लेकिन इन सब के बीच खास बात यह रही कि आजादी के बाद से ही देश में सेकुलरिज्म के नाम पर जो राजनीति की जा रही थी इस इस बार देश ने इसे पूरी तरह से नकार दिया. जनता ने विकास और राष्ट्रवाद के नाम पर वोट डाले. मोदी का विकल्प सिर्फ मोदी ही हैं और इस बात को प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी ने एक बार फिर से साबित कर दिया है. bjp 2019 elections

देश में सेकुलरिज्म की राजनीति करने वालों को जनता द्वारा नकारे जाने पर करीब साल भर पहले का वो दृश्य याद आ रहा है जब आंधप्रदेश के पूर्व सीएम चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में सेकुलर मोर्चा बनाकर थर्ड फ्रंट बनाने की कोशिश की गई थी. उस दौरान एक मंच पर देशभर के 21 दलों के नेता इकट्ठा हुए थे जिसमें बसपा प्रमुख मायावती, टीडीपी चीफ चंद्रबाबू नायडू, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, एनसीपी चीफ शरद पवार, शरद यादव, त्रिणमूल कांग्रेस चीफ ममता बनर्जी, आम आदमी पार्टी चीफ अरविंद केजरीवाल, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव सहित तमाम छोटे बड़े दल इसमें शामिल थे. bjp 2019 elections

उस दौरान इन सभी ने एक सुर में प्रधानमंत्री पर उग्र हिंदू राष्ट्रवाद और धर्म के नाम पर देश को बांटने का आरोप लगाते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री धर्म के नाम पर देश को बांटकर भारत के सेकुलरिज्म की छवि को नष्ट करने की कोशिश कर रहें है. इतना ही नही चुनावों से पहले पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने भी भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी को मात देने के लिए कोलकाता में देशभर के तमाम विरोधी दलों को एकमंच पर एकत्रित कर सेकुलरिज्म को बचाने के लिए महागठबंधन बनाने की कोशिश किया था.

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हालांकि ममता की यह कोशिश पूरी तरह से फ्लाप साबित हुई क्योंकि सभी राजनीतिक दलों के अपने-अपने राजनीतिक हित थे. लेकिन खास बात यह थी महागठबंधन फेल होने के बावजूद इन दलों की राजनीति सेकुलरिज्म पर हीं आधारित रही. इसी क्रम में यूपी में बसपा-सपा और आरएलडी का गठबंधन भी बना लेकिन फिर भी जनता ने इन सभी राजनीतिक दलों के सेकुलरिज्म के मुखौटे को नकार दिया. 2019 लोकसभा चुनावों में जहां अकेले दम बीजेपी ने सिर्फ प्रचंड बहुमत हासिल किया बल्कि 300 का आंकड़ा भी पार करते हुए 303 सीटों पर जीत हासिल किया. वहीं एनडीए ने 352 सीटों पर जीत दर्ज करने में सफलता हासिल किया. सारा विपक्ष मिलकर भी बहुमत के आसपास तक नहीं पहुंच सका. bjp 2019 elections

इस चुनाव में एनडीए के बाद कांग्रेस सहित यूपीए गठबंधन 85 सीटों पर सिमट गया, यूपी में माया-अखिलेश के महागबंधन को 21 सीटें और अन्य के खाते में 75 सीटें गई. इन नतीजों को देखने के बाद स्वाभाविक तौर पर यह स्पष्ट हो जाता है कि देश ने सेकुलरिज्म के नाम पर देश को जाति और धर्म में बांटकर राजनीति करने वालों को करारा जबाव दिया है. इस चुनाव में जहां एक तरफ भाजपा राष्ट्रवाद के एजेंडे के साथ खड़ी थी तो दूसरी तरफ तथाकथित सेकुलर दल थे.

चुनाव में भाजपा ने राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर चुनाव लड़ा था तो इसके ठीक विपरीत विपक्षी दलों नें “अनुच्छेद 370 और धारा 35 A” को बरकरार रखने और सरकार द्वारा लाए सुधारात्मक  “तीन तलाक बिल” को खत्म करने के मुद्दे पर चुनाव लड़ा था. यही वजह रही कि सेकुलरिज्म के नाम पर राजनीति करने वाले राजनीतिक दलों के खिलाफ भाजपा जनता में राष्ट्रवाद, एक मजबूत सरकार और विकास का फार्मूला को पूरी तरह से समझाने में कामयाब रही. bjp 2019 elections

इसे इस बात से इससे आसानी से समझा जा सकता है कि लोकसभा चुनाव जीतने के बाद प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी ने भाजपा के दिल्ली के दीनदयाल मार्ग स्थित मुख्यालय़ पर पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा था कि “इस बार के चुनावों में सेकुलरिज्म का झंडा बुलंद कर राजनीति करने वाली राजनीतिक पार्टियीं सेकुलरिज्म का नाम लेने की भी हिम्मत नही कर सकीं.” जानकारों की माने तो इस बार के चुनाव में भाजपा के पक्ष में एक अंडर करेंट चल रही थी जिसकी आंधी में सारे सेकुलर दल हवा बन गए. bjp 2019 elections

                                                                                                                                -कुलदीप सिंह

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