बहुत याद आएंगे आप…

इस बार के चुनाव में कई ऐसे नेता हैं जिन्हें चुनाव में न देखकर अधुरापन लगा। पहले इनके बयानों से समाचार पत्र अटा पटा रहता था। लेकिन इस बार के चुनाव में खासतौर पर लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, लालू यादव, वैकेंया नायडू की कमी साफ तौर पर दिखी। लालकृष्ण आडवाणी इस बार चुनावी मैदान में नहीं उतरे। bjp leaders

लालकृष्ण आडवाणी राम मंदिर आंदोलन को ऊंचाईयों पर ले जाने के लिए जाने जाते हैं। उनके सभा में मौजूद होने से ही सीरीराम के नारे लगते रहे थे। लेकिन इस बार चुनाव में मुद्दे भी बदले और आडवाणी भी मन मशोसकर अपना मन बदला और चुनाव नहीं लड़े। bjp leaders

लेकिन जब मतदान करने गए तो उनकी नम आंखें बहुत कुछ कह रही थी. छह बार से गांधीनगर से सांसद रहे आडवाणी इस बार संसद में भी चुप ही रहे यहां तक कहा जाने लगा कि नहीं कुछ बोल रहे हैं तो केवल जय सिरीराम ही बोल देते।bjp leaders

वहीं मुरली मनोहर जोशी भी कानपुर से चुनावी मैदान में पिछली बार थे इस बार इन्हें भी शांत बैठाया गया। पिछली बार लोकसभा चुनाव जीतकर भी कुछ कर नहीं पाए। न मंत्री बन पाए और न ही कोई खास बयान दिए।bjp leaders

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मुरली मनोहर जोशी पिछली बार ही कड़े मन से अपना चुनाव छेत्र बदला। लेकिन वे बड़े आराम से चार लाख मतों से विजयी भी हुए। लेकिन इस बार बुजुग होने के कारण इन्हें चुनाव से दूरी बनाए रखा गया। हालांकि शुरुआत में इन्होंने मुरली मनोहर जोशी ने अपने तेवर दिखाए और इन्होंने साफ कह दिया कि जो तरीका अपनाया गया वह ठीक नहीं था। इन्होंने भाजपा ने अपनी गलती सुधार कर मुरली मनोहर जोशी को मना लिया।bjp leaders

मुरली मनोहर जोशी पिछली बार ही कड़े मन से अपना चुनाव छेत्र बदला। लेकिन वे बड़े आराम से चार लाख मतों से विजयी भी हुए। लेकिन इस बार बुजुग होने के कारण इन्हें चुनाव से दूरी बनाए रखा गया। हालांकि शुरुआत में इन्होंने मुरली मनोहर जोशी ने अपने तेवर दिखाए और इन्होंने साफ कह दिया कि जो तरीका अपनाया गया वह ठीक नहीं था। इन्होंने भाजपा ने अपनी गलती सुधार कर मुरली मनोहर जोशी को मना लिया।bjp leaders

एक और नेता हैं जिनके बिना यह चुनाव पूरी से अधूरा लगा। जी हां वह हैं लालू यादव। वे चारा घोटाले के आरोप में जेल में हैं। और चुनाव से दूर हैं। हालांकि अपनी पाटी के लिए टिकट का बंटवारे किया लेकिन जो उनका तेवल चुनाव में देखने को मिलता रहा है जिस प्रकार से चुनाव में वे छाए रहे हैं इस बार उनकी कमी साफ नजर आई।

लालू यादव अपने बयानों और अपनी शैली से जाने जाते रहे हैं लेकिन इनके बिना यह चुनाव पूरी तरह से अधुरा लगा। हालांकि इनका परिवार पूरी तरह से चुनावी मैदान में छाया रहा लेकिन लालू के बिना यह सब अधुरा लगा। लालू की कमी इस चुनाव में साफ दिखी।bjp leaders

वहीं एक और नेता है वह हैं उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू। वेंकैया नायडू भले ही लोकसभा चुनाव नहीं लड़ते थे लेकिन जब राजनीति में सक्रियता ही युवाओं में जान डाल देती थी। खासकर इनका चुनावी भाषण काफी मजेदार होता था। और पत्रकारों के लिए मनोरंजक भी।

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जिस प्रकार स वेंकैया नायडू अपने बयान हिंदी और अंग्रेजी को मिलाकर नए शब्द गढ़ते रहे हैं वह काफी रोचक हुआ करता था। अभी नायडू उपराष्ट्रपति पद पर सुशोभित हैं इसलिए राजनीति में सक्रियता से दूर हैं।bjp leaders

बहरहाल इस बार के चुनाव में कई पुराने नेताओं की विदाई हो गई है जिसमें कुछ ने तो चुनाव में अपनी भागीदारी भी किया तो कईयों ने इस बार के चुनाव से तौबा किया। अब तो ऐसे नेताओं को बस यादकर इनकी राजनीति को समझकर आगे की राजनीति तय किया जा रहा है।

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