राहुल अध्यक्ष रहें न रहें, कांग्रेस में गांधी परिवार की ही चलेगी

लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए बीते दिनों कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था जिसके बाद से पार्टी में मानों इस्तीफों की झड़ी सी लग गई. हालांकि कांग्रेस की वर्किंग कमीटी ने राहुल के इस्तीफों को स्वीकार नहीं किया था लेकिन वो अपना इस्तीफा देने की जिद पर अड़े रहे. इस बीच हाल ही में एक बार फिर से उन्होंने लोकसभा चुनावों में पार्टी की हार की जिम्मेदारी नहीं लेने को लेकर कहा था कि “ नेता इतनी बड़ी हार के बावजूद कुर्सी से चिपके बैठे हैं, कोई भी अपना इस्तीफा नहीं दे रहा है.”  

कांग्रेस ने 60 सालों तक गरीबों का शोषण किया – रवि किशन

राहुल के इस बयान के कांग्रेस के एक के बाद एक बड़े नेताओं ने अपने पद से इस्तीफा देना शुरु कर दिया. इसी क्रम में उत्तरप्रदेश में पार्टी के पश्चिमी यूपी के प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया, महाराष्ट्र कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक चव्हाण सहित कई कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने भी अपना इस्तीफा दे दिया. जिसके बाद से पार्टी में राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित कई पद नेतृत्व विहीन हो गए है. जिसको लेकर कांग्रेस के गुना से पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी हाल ही में कहा था कि “राहुल गांधी को पार्टी के अध्यक्ष के रूप इस्तीफा दिए महीनों बीत चुके हैं और अब दूसरा अध्यक्ष चुनने में ज्यादा देरी करने से पार्टी को काफी नुकसान हो सकता है.”

यह सब्जी नहीं ब्लड बनाने की मशीन है

खास बात यह है कि पिछले दिनों राहुल गांधी ने अपना इस्तीफा देने के बाद कहा था कि अब से पार्टी के किसी भी फैसले में उनका कोई रोल नहीं होगा और अब से वह पार्टी में मात्र एक सदस्य के तौर पर रहेंगे. लेकिन महाराष्ट्र में जो कुछ हुआ उससे यह बात एक बार फिर से साबित हो गई कि राहुल गांधी ने भले ही कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया हो लेकिन हकीकत यह है कि पार्टी में अभी भी गांधी परिवार की ही चलेगी. ऐसे में उनका इस्तीफा एक दिखावा मात्र रह गया है. यह सब वैसा ही है जैसे पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ही आंशिक पीएम थे लेकिन सत्ता कहीं और से ही कंट्रोल होती थी.

यह बात इसलिए कहनी आवश्यक हो जाती है क्योंकि राहुल गांधी ने अशोक चव्हाण के महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद बालासाहब थोराट को महाराष्ट्र इकाई का अध्यक्ष बनाया है इसके साथ ही उन्होंने पांच कार्यकारी अध्यक्ष भी नियुक्त किए हैं जिसमें डॉ. नितिन राउत, बस्वाराज एम पाटिल, विश्वजीत कदम, यशोमति चंद्रकांत ठाकुर और मुजफ्फर हुसैन शामिल हैं. अहम बात यह है कि जब खुद राहुल गांधी ने पार्टी के अध्यक्ष पद से अपना इस्तीफा दे दिया है तो फिर अधिकारिक तौर पर वह किसी की नियुक्ति करने या उसे हटाने के योग्य ही नहीं रहे.

लेकिन अंततोगत्वा यह बात सिद्ध हो गई है कि पार्टी का अगला अध्यक्ष कोई भी हो, उसे पपेट बनकर ही रहना होगा. और कांग्रेस में पहले भी गांधी परिवार की चलती थी और आगे भी चलेगी.

-कुलदीप सिंह 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *