उर्मिला के स्टारडम और शेट्टी के विकास में टक्कर

लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा को उसके सुरक्षित सीट उत्तर मुंबई लोकसभा में मात देने के लिए कांग्रेस ने बालीवुड की छम्मा-छम्मा गर्ल उर्मिला मातोडकर को यहां के मौजूदा सांसद भाजपा के गोपाल शेट्टी को मात देने के लिए चुनावी मैदान में उतार दिया है.

लेकिन गोपाल शेट्टी के जमीनी कार्यों के सामने उर्मिला का स्टारडम भी कुछ खास असर नही दिखा पा रहा है. इसके पीछे बड़ा कारण यह रहा कि 2004 में उत्तर मुंबई से कांग्रेस की सीट पर सांसद बने पर उनके दस महिनों के कार्यकाल के दौरान जनता के लिए बिल्कुल भी काम नही करने का आरोप लगा था इसके साथ ही यह भी आरोप गोविंदा पर लगे थे कि उन्होने अपनी सांसद राशि का विकास कार्यों के लिए बिल्कुल भी उपयोग नहीं किया था.

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इसके अलावा एक स्टार होते हुए भी गोविंदा अपने विरोधी रहे यूपी के मौजूदा राज्यपाल राम नाइक को मात्र 11,000 वोटों के अंतर से ही हरा पाए थे. इसे दूसरे शब्दों में कहें तो राम नाइक ने गोविंदा के स्टारडम को तगड़ी चुनौती दिया था.

ऐसे में कांग्रेस उम्मीदवार उर्मिला मातोडकर का हाल दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंक कर पीता है वाला हो गया है. हालांकि उर्मिला को चुनावी मैदान में उतारकर कांग्रेस ने एक बार फिर से बालीवुड स्टार पर भरोषा किया है.

वहीं दूसरी तरफ भाजपा ने उत्तर मुंबई से ही अपने मौजूदा सांसद गोपाल शेट्टी पर एक बार फिर से भरोषा जताया है. जानकारों की माने तो अभिनेता गोविंदा का अनुभव ले चुके उत्तर मुंबईवासियों के लिए कांग्रेस उम्मीदवार उर्मिला मातोंडकर कोई खास लोगों को आकर्षित नहीं कर पा रही है.

हालांकि उर्मिला के जनसंपर्क के दौरान उनके साथ भीड़ जुटती है लेकिन जैसे ही बात क्षेत्र के लोगों के विकास के लिए की जाती है तो उर्मिला मातोडकर भाजपा उम्मीदवार वर्तमान सांसद गोपाल शेट्टी से मात खा जाती हैं.

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खास बात यह है कि गोपाल शेट्टी जमीनी राजनीति से प्रगति कर संसद तक पहुंचे हैं वह मुंबई महानगरपालिका में इसी क्षेत्र के एक वार्ड से तीन बार सभासद और इसी क्षेत्र के बोरीवली विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे थे ऐसे में उन्हे इस क्षेत्र के बारे में बारीकी से जानकारी है.

वह लोगों से न सिर्फ जमीनी तौर पर जुड़े हुए हैं बल्कि उज्जवला योजना के तहत मुंबई की झोपड़पट्टियों में करीब 18 सिलेंडर भी बंटवाया है. इसके अलावा 300 से अधिक शौचालय भी बनवाया. और आयुष्मान योजना के तहत लोगों का जोड़ा है.

यही कारण है कि जब वह अपने जनसंपर्क अभियान पर निकलते हैं तो उनके स्वागत में जगह-जगह ‘विकास-विकास-विकास, गोपाल शेट्टी मांझे विकास’ के नारे लगते हैं. जबकि उर्मिला मातोंडकर का स्वागत कई जगह मोदी-मोदी के नारों से हो चुका है.

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लेकिन इन सबसे ऊपर है, क्षेत्र में शेट्टी की सतत उपलब्धता. इलाके में जब भी किसी को कोई भी समस्या होती है उस जगह शेट्टी लोगों की मदद करने के लिए मौजूद रहते हैं. यही वजह है कि यहां का संगठनात्मक अरिथमेटिक कांग्रेस के विरोध में जाता दिख रहा है.

इसके साथ ही उत्तर मुंबई लोकसभा के स्थानीय लोगों का भी मानना है कि गोपाल शेट्टी ने इस क्षेत्र के लिए काफी कुछ किया है इसलिए वह दोबारा से चुनकर आने चाहिए.

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राजनीतिक तौर पर उत्तर मुंबई लोकसभा क्षेत्र की छह में से पांच विधानसभाओं पर फिलहाल शिवसेना-भाजपा का कब्जा है और भाजपा-शिवसेना में एक बार फिर से गठजोड़ हो गया है. इतना ही नहीं क्षेत्रीय मुद्दों के रूप में देखें तो मुंबई महानगरपालिका के 43 में से 38 सभासद भाजपा-शिवसेना के हैं.

इसके अलावा पिछले लेकसभा चुनाव में उत्तर मुंबई लोकसभा सीट पर गोपाल शेट्टी ने उस दौरान मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष संजय निरुपम को करीब 4.5 लाख वोटो के अंतर से हराया था. ऐसे में करीब से यहां के चुनावी गणित को समझने पर कांग्रेस की हालत यहां पर बेहद पतली दिखाई दे रही है.

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