कर ‘नाटक’ : शक्ति परीक्षण में शामिल होने के लिए बाध्य नहीं होंगे बागी MLA

कर ‘नाटक’ में लंबे समय से चल रहे सियासी घमासान के बीच कल होने वाले राज्य की जेडीएस-कांग्रेस वाली गठबंधन सरकार के बहुमत परीक्षण से पहले 15 असंतुष्ट विधायकों के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने अपना फैसला सुनाते हुए राज्य के स्पीकर केआर रमेश कुमार को आज ही फैसला लेने को कहा है.

इसके साथ ही शीर्ष न्यायालय ने अपने अहम फैसले में आदेश दिया है कि राज्य सरकार अथवा स्पीकर 15 बागी विधायकों को सदन की कार्यवाही में भाग लेने  के लिए मजबूर नहीं कर सकती है. इस बीच, मंगलवार को सत्तारूढ़ गठबंधन के दस बागी विधायकों ने एससी में कहा था कि उनके इस्तीफे को “स्वीकार करना होगा” क्योंकि वर्तमान राजनीतिक संकट से निपटने का कोई अन्य तरीका नहीं था.

आज दोपहर की बड़ी खबरें | 17th July 2019

वहीं अब खबर आ रही है कि सभी विधायकों ने एक साथ एलान किया है कि वह कल होंने वाले शक्ति परीक्षण में शामिल नहीं होंगे. वहीं सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के आने के बाद कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमीटी ने आज ट्वीट कर कहा कि “भाजपा का आपरेशन कमल फेल हो गया है. सत्य़ मेव जयते”.

वहीं दूसरी तरफ भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए “इसे संविधान और लेकतंत्र की विजय बताया.” इसके साथ ही उन्होंने इस फैसले को “बागी विधायकों की भी स्वतंत्रता की विजय” बताया है.

इसी मुद्दे पर मीडिया से बात करते हुए राज्य के विधानसभा अध्यक्ष केआर रमेश ने भी “कोर्ट के फैसले का स्वागत किया और कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने उनपर एक और जिम्मेदारी लाद दिया है.” और मैं कोर्ट के इस आदेश का पालन करूंगा.

चिड़चिड़े और गुस्सैल लोगों के लिए जादुई उपचार

फिलहाल अब विधानसभा अध्यक्ष के आर रमेश को कांग्रेस-जेडीएस के 15 असंतुष्ट विधायकों के इस्तीफों पर फैसला लेना हैं. और कल कुमारास्वामी सरकार का फ्लोर टेस्ट है, ऐसे में मौजूदा सरकार के लिए बहुमत सिद्ध करना बड़ी चुनौती होगी. क्योंकि 224 विधानसभा सीटों वाले कर्नाटक विधनसभा में भाजपा 105 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है. और अगर 15 बागी विधायकों का इस्तीफा स्वीकार कर लिया जाता है तो कुमारास्वामी सरकार के पास केवल 102 एमएलए का समर्थन बचेगा. जिसका फायदा अंतत: भाजपा को मिल सकता है.

खास बात यह है कि राज्य सरकार से हाल ही में अपना समर्थन वापस लेने वाले 2 निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी भाजपा के पास ही है. जिससे सियासी स्थिति बीजेपी के पक्ष में जाती दिख रही हैं. बहरहाल कर्नाटक का सियासी ऊंट किस करवट बैठेगा इसका पता तो शक्ति परीक्षण के बाद ही चल पाएगा. 

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