मत करना चीन पर भरोषा: समिति



चीन की ओर से भारतीय सीमा में होने वाली घुसपैठ को लेकर चिंता जाहिर करते हुए संसद की विदेश मामलों की समिति ने सरकार को चीन से सतर्क रहने की चेतावनी दी है. समिति ने चीन के द्वारा स्पेशल रीप्रजेंटेटिव मेकेनिज्म के अंतर्गत बने सिद्धांतों को नहीं मानने को लेकर चिंता जाहिर की गई है. समिति ने केंद्र सरकार को सलाह देते हुए कहा है कि वह चीन से इस बात की उम्मीद करे कि वह मात्र सिद्धांतों की ही बातें नहीं करे बल्कि उन पर अमल भी करे. mat karna china pe bharosa

भरोषा करने लायक बिलकुल भी नहीं है. mat karna china pe bharosa

गौरतलब है कि स्पेशल रिप्रजेंटेटिव मेकेनिज्म की स्थापना 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अपने चीन दौरे के बाद किया था. इसका मुख्य उद्देश्य सीमा विवाद का हल निकालना था. लेकिन चीन ने कभी भी इस मैकेनिज्म का पालन नहीं किया उसने हमेशा ही भारतीय सीमा में घुसपैठ की. संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में चीन के पिछले रिकार्ड का हवाला देते हुए कहा है कि उसका रिकार्ड उस पर भरोषा करने लायक बिलकुल भी नहीं है. mat karna china pe bharosa

बता दें कि स्पेशल रिप्रजेंटेटिव मेकेनिज्म बनने के बाद से भारत और चीन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच 20 राउंड की वार्ता हो चुकी है. लेकिन इतनी बैठके होने के बावजूद अब तक सीमा विवाद का हल नहीं निकाला जा सका है. हालांकि इस मैकेनिज्म को इस विवाद का हल निकालने के लिए बेहद अहम माना जाता रहा है. mat karna china pe bharosa

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संसदीय समिति का मानना है कि यह एक त्रिस्तरीय प्रक्रिया है जिसकी पहली स्टेज वर्ष 2005 में  ‘अग्रीमेंट ऑन द पॉलिटिकल पैरामीटर्स ऐंड गाइडिंग प्रिंसिपल्स ऑन द सेटलमेंट ऑफ द इंडिया-चाइना बाउंड्री क्वेश्चन’ पर दोनों देशों की ओर से साइन के साथ पूरा हो गया है. भारत और चीन में तय हुए सिद्धांत के मुताबिक़ डॉन देश कभी भी एक दूसरे की सीमाओं में बसी हुई आबादी को डिस्टर्ब नहीं किया जाएगा. जबकि इसके उलट अरुणांचल पर अपना अधिकार जताने वाला चीन इस सिद्धांत की खुले तौर पर धज्जियाँ उड़ाता है. इसके साथ ही कमीटी ने भारत चीन सीमा से लगते क्षेत्रों में कमजोर इन्फ्रास्ट्रक्चर को लेकर चिंता जाहिर की हैं. mat karna china pe bharosa

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