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27/03/2019
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इस दीवाली बच्चे छोड़ेंगे कागज के फटाखे




बूम, फटाक…… तर तर तर तर बूम। ये आवाज़ क्या आने वाले दिनों में सपना बन जाएगा। वर्तमान परिवेश में ऐसा ही प्रतीत होता है क्योंकि न केवल दिल्ली बल्कि इसके आस-पास के इलाकों के बच्चे इस दिवाली उदास है। इसका मुख्य कारण सुप्रीम कोर्ट का आदेश है। जिसमें दिल्ली और उसके आस पास के इलाकों में फटाखा बिक्री पर पूरी तरह से पाबन्दी है। paper crackers 

बार बार याचिका और आलोचना स्लोगन लगाने के बाबजूद सुप्रीम कोर्ट का दिल इन बच्चों पर नहीं पिघला। पिघले भी क्यों, क्योंकि केजरीवाल सरकार ने इसके लिए कोई कदम नहीं उठाया। जिसका खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ा। अब बच्चे कंचे और गिल्ली डंडा खेलने पर मजबूर है। कुछ बच्चों से जब हमने बात की तो उनका कहना था। paper crackers 

इलेक्ट्रॉनिक फटाखे छोड़ने को मजबूर होंगे।

दीपावली वर्ष में एक बार आता है। इस पर्व पर हम सभी बच्चे खूब लड़ी, फुलझड़ियां और बम फटाखे छोड़ते आ रहे है। लेकिन इस बार सुप्रीम कोर्ट ने बिक्री पर पाबन्दी लगा दी है। इसलिए इस बार दिवाली पर फटाखे नहीं लगा पाएंगे। वही रोज तो क्रिकेट खेलता हूँ, बोलू तो वर्ष भर क्रिकेट खेलते है। लेकिन दिवाली पर इस बार हम कंचे और गिल्ली डंडे खेल रहे है। स्कूल की छुट्टी हो गयी है। दिन भर घर में बैठकर बोर हो जाता हूँ। paper crackers 

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बच्चों का कहना जायज है। जो उमंग और उत्साह दिल्ली के बच्चों ने करवा चौथ के दिन फटाखा छोड़ें में दिखाया था। वो अब बेअसर हो गया है। बाजार में कही भी फटाखा उपलब्ध नहीं है। वैसे दिल्ली में फटाखों की बिक्री पर पाबन्दी के लिए कौन जिम्मेवार है ? सरकार या बच्चे। जबाब सरकार आएगा। paper crackers 

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जी हां, प्रदेश और देश में सत्ता की बागडोर एक पार्टी से दूसरी पार्टी के पक्ष में जाती है। लेकिन मंत्री सरकारी सुविधाओं में इतने व्यस्त हो जाते है कि वो अपने मूल कर्तव्य को भूल जाते है। सरकार बनने से पहले केजरीवाल और उनके मंत्री भी कुछ ऐसे ही झूठे वादे कर रहे थे। जिस तरह कांग्रेस ने पूर्व में की थी। लेकिन सत्ता मिलने के बाद सब कुछ बदल गया। काम में जीरो और सरकारी काम काज के जाम के ये हीरो हो गए। यदि सरकार समय के साथ अपने रवैये में बदलाव नहीं करती है। तो आने वाले दिनों में बच्चे दिवाली और छठ के अवसर पर कागज और इलेक्ट्रॉनिक फटाखे छोड़ने को मजबूर होंगे। paper crackers 



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