लोकसभा चुनाव : पटना साहिब सीट पर इस बार मुकाबला दिलचस्प

बिहार की राजधानी पटना अपना अलग राजनीतिक महत्व रखता है. गंगा के तट पर बसा पटना शहर का इतिहास भी काफी पुराना है. आज हम बात करेंगे इस लोकसभा चुनाव में काफी चर्चा में बने हुए पटना साहिब लोकसभा सीट की. यहां तख़्त श्री पटना साहिब का गुरूद्वारा है जिसे श्री हरमंदिर जी, पटना साहिब के नाम से भी जाना जाता है. यह स्थान सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह के जन्म स्थान तथा गुरु नानक देव के साथ ही गुरु तेग बहादुर सिंह की पवित्र यात्राओं से जुड़ा है.

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वेसे तो पटना में दो लोकसभा की सीटें है एक पटना साहिब और दूसरा पाटलिपुत्रा है लेकिन इस बार के लोकसभा चुनाव में यहां का पटना साहिब सीट खासा चर्चा में है. वर्तमान में पटना साहिब से शत्रुघ्न सिन्हा सांसद हैं, तो पाटलिपुत्र से राम कृपाल यादव. जैसा की हाल ही में शत्रुघ्न सिन्हा ने हाल ही में कांग्रेस पार्टी ज्वाइन कर ली है तो इस कारण से भी यह लोकसभा सीट खासे चर्ची में है और सवाल यहां ये की क्या इस बार इस सीट से भाजपा उम्मीदवार केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद इस सीट पर जीत कर पाएंगे.

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तो आइये चर्चा करते है पटना साहिब लोकसभा सीट के बारे में औऱ जानते है की इस लोकसभा सीट पर अभी तक किन किन पार्टियों ने जीत हासिल की है और इस बार के लोकसभा चुनाव में कौन सी पार्टी करेगी इस सीट पर जीत दर्ज. पटना साहिब सीट का इतिहास ज्यादा पुराना नहीं है. 2008 के पहले पटना में एक ही संसदीय क्षेत्र हुआ करता था लेकिन वर्ष 2008 में परिसीमन के बाद यह नई सीट बनाई गई. शुरुआत में 1952 से 1962 तक जहां कांग्रेस का कब्जा रहा है इसके बाद सीपीआई यानी काम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया ने इस संसदीय इलाकों पर कब्जा कर लिया.

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1967 में कांग्रेस के प्रत्याशी राम दुलारी सिन्हा को हरा कर रामवतार शास्त्री यहां चुने गए और उन्हों लगातार 1971 तक यहां सं सासंद रहे इसके बाद 1977 में जनता पार्टी की लहर में यह सीट जनता पार्टी के झोली में थी जिसके प्रत्याशी महामाया प्रसाद सिन्हा ने जीत हासिल की। लेकिन इसके बाद फिर से राम अवतार शास्त्री पुनः चुने गए यानी 1980 में इस सीट पर काम्यूनिस्टों का कब्जा हो गया। हम आपको बता दें कि पटना संसदीय काम्युनिस्टों का गढ़ हो गया था। राजनीतिक हलचल में सबसे तेजी रहने वाला स्टेट बिहार की राजधानी पटना में राजनीतिज्ञों का जमावड़ा लगा ही रहता है। ऐसे में यहां पटना विश्वविद्यालय स्थित है जो अपने प्रतिष्ठित अध्ययन और अध्यापन के लिए जाना जाता है।

यहां छात्र संघ काफी सक्रिय है और यह क्षेत्र इससे भी प्रभावित रहा है। 1984 के चुनाव में कह सकते हैं पटना में बदलाव आना शुरू हो गया। इस समय ईमानदारी के लिए जाने जाने वाले वाले रामवतार शास्त्री यहां से सांसद थे, लेकिन इस चुनाव में उन्हें कठिन संघर्ष करना पड़ा। इस समय इनके सामने जहां कांग्रेस ने प्रसिद्ध डाक्टर सीपी ठाकुर को खड़ा किया वहीं निर्दलीय उम्मीद एसके सिन्हा भी सामने थे. खास बात यह है कि एसके सिन्हा ने सेना से इस्तीफा देकर चुनाव लड़ रहे थे और अपनी जाति के वोटरों में काफी लोकप्रिय भी थे। लेकिन पटना विश्वविद्यालय में सीपी ठाकुर ने जोरदार कैम्पेन चलाया और इतिहास बदलने में कामयाब हो गए.

1984 में पटना से कांग्रेस के उम्मीदवार सीपी ठाकुर जीत हासिल की। इसके बाद से ही भाजपा शहरी इलाकों में काफी जोरदार प्रचार में लगी थी तो भला कहां पटना अछुता रहने वाला था और 1989 में पटना विश्वविद्यालय के बीएन कॉलेज के हिंदी के प्रो. शैलेंद्र नाथ श्रीवास्तव ने जीत हासिल की. तब तक काम्युनिस्टों का गढ़ टूट चुका था और अब यहां से जनता दल ने अपनी पैठ बनाना शुरू कर दिया. इसी कारण से लालू का जलवा यहां भी छाया और लालू के चेहते रामकृपाल यादव ने दो बार लगातार 1991-1996 तक लगातार सांसद रहे। लेकिन इसके बाद फिर भाजपा की लहर काम आने लगी तब तक कांग्रेस के नेता डॉ सीपी ठाकुर ने हवा के रूख को पहचान लिया और भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली.

उसके बाद वे यहां से 1998-1999 में सांसद चुने गए। लेकिन 2004 के चुनाव में राजद के प्रत्याशी रामकृपाल यादव यहां से पुनः निर्वाचित हो गए। 2008 में पटना लोकसभा क्षेत्र परिसीमन में दो भागों में बंट गया एक क्षेत्र पटना साहिब हुआ जबकि दूसरा क्षेत्र पाटलिपुत्र नाम दिया गया। उसके बाद पटना साहिब से भाजपा प्रत्याशी शत्रुध्न सिन्हा दो बार से सांसद रूप में यहां से प्रतिनिधि है। लेकिन इस बार यहां चुनावी परिदृश्य अलग है. इस सीट पर जीत दर्ज करने के लिए कांग्रेस और भाजपा दोनों ही जीतोड़ मेहनत कर रही है. पटना साहिब सीट पर हाल ही में भाजपा का साथ छोड़कर कांग्रेस का हाथ थामने वाले शत्रुघ्न सिन्हा का मुकाबला केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद से है जो इस बार इस सीट से भाजपा प्रत्याशी है.

आपको बता दे की शत्रुघ्न सिन्हा पटना साहिब सीट से लगातार दो बार चुनाव जीतकर संसद पहुंच चुके हैं तो वहीं रविशंकर प्रसाद पहली बार कोई चुनाव लड़ रहे हैं. इन सभी बातों को लेकर अब पटना साहिब लोकसभा सीट पर मतदाताओं में बड़ी उत्सुकता देखी जा रही है. मुकाबला यहां काफी कड़ा होने की उम्मीद जताई जा रही है. इसके सात ही आपको हम यह भी बता दे की इस सीट से अभिनेता शेखर सुमन और कुणाल सिंह भी चुनाव लड़ चुके हैं. अब बात करते है पिछले लोकसभ चुनाव यानि 2014 के लोकसभा चुनाव की. 2014 के लोकसभा चुनाव में शत्रुघ्न सिन्हा को कुल 485905 मिले थे जबकि इस सीट से कांग्रेस के कुणाल सिंह को 220100 मत प्राप्त हुए थे. वहीं जदयू के डॉ गोपाल प्रसाद सिन्हा को 91,024 वोट मिले थे.

इसके पहले 2009 में शत्रुघ्न सिन्हा ने राजद प्रत्याशी को हराकर इस सीट पर कब्जा किया था.2009 के चुनाव में शत्रुघ्न सिन्हा को 3,16,549 मत मिले थे तो दूसरे स्थान पर राजद के विजय कुमार थे, जिन्हें 1,49,779 वोट प्राप्त हुए थे। इस सीट पर कांग्रेस से शेखर सुमन चुनाव लड़े थे, जो तीसरे नंबर पर थे जिन्हें कुल 61,308 वोट मिले थे. आपको बता दे की इस क्षेत्र की कुल आबादी करीब 25.74 लाख है और इस आबादी का 73.37 प्रतिशत हिस्सा शहर में और शेष 26.63 प्रतिशत गांव में बसता है. 2015 में हुए विधानसभा चुनाव के मुताबिक पटना साहिब में कुल मतदाता 20,51,905 हैं.

बात अगर 2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट की करे तो 2014 में मोदी लहर की वजह से शत्रुघ्न सिन्हा को बहुत अधिक मत मिले थे लेकिन इस बार पार्टी बदल गई है और उनके सामने उनके ही पुराने साथी हैं, जो कभी उनके लिए पटना साहिब में वोट मांगने के लिए आया करते थे जिससे अब इस बार मुकाबला काफी रोचक होने की संभावना साफ दिखाइ दे रही है. अब यहां देखना काफी दिलचस्प होगा की क्या कांग्रेस के शत्रुघ्न सिन्हा अपनी सीट को बरकरार रखने में कामयाब हो पाएंगे या रविशंकर प्रसाद को मिलेगी जीत. इसका पता तो तभी चल पाएगा जब 23 मई को लोकसभा चुनाव 2019 के चुनाव परिणाम घोषित होंगे. लेकिन इतना जरूर है की इस बार पटना साहिब लोकसभा सीट पर मुकाबला बहुत कांटे का होने वाला है. आपको बता दे की पटना साहिब में मतदान सातवें में 19 मई को होगें.

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