सरकारी कोशिशों के बावजूद घर नहीं खरीद पा रहे लोग, 4 साल में स्थिति हुई बदतर

मोदी सरकार एक तरफ 2022 तक भारत के हर नागरिक को घर देने के लिए जोर लगा रही है जिसके तहत प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत घर बनाने के लिए धन उपलब्ध करवाये जा रहे हैं. इसके साथ ही सरकार नई आवास योजनाएं ला रहीं है, वहीं दूसरी ओर सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद लोगों की घर खरीदने की क्षमताओं में बेहद कमी दर्ज की गई है. इस बात का दावा कोई और नहीं बल्कि रिजर्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में किया है. rbi report home buys

दरअसल भारतीय रिजर्व बैंक ने देशभर के करीब 13 शहरों में कराए गए एक सर्वे के जरिए इस बात का खुलासा किया है कि पिछले चार वर्षों में आय के मुकाबले मकानों की कीमतों के औसत रेट में तेजी से इजाफा हुआ है. दरअसल लोगों की आय से ज्यादा घरो की कीमतें बढ़ गई हैं जिससे कम आय के चलते देश में लोगों की घर खरीदने की क्षमताओं में नाटकीय ढंग से कमी आई है.

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स्थिति यह है कि सरकार की तमाम कोशिशों और योजनाओं के बावजूद 4 सालों में घर क्रय करने की क्षमता बदतर स्थिति में पहुंच गई है. आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2015 में घर खरीदने में कमी की दरें 56.1 थी जो बढ़कर मार्च 2019 में 61.5 फीसदी पर पहुंच गई है. खास बात यह है कि इस मामले में सबसे ज्यादा खराब हालत मुंबई के लोगों की है जहां घर खरीदने की दर में सबसे ज्यादा कमी देखी गई है. वहीं भुवनेश्वर इस मामले में सबसे बेहतर स्थिति में है. rbi report home buys

खास बात यह है कि साल 2015 से 2019 के दौरान लोगों की आय के अनुपात में कर्ज लेने के औसत में भी वृद्धि दर्ज की गई है जो अब मार्च 2015 के 3 अंक से बढ़कर 2019 में 3.4 अंक हो गया है. ऐसे में बैंकों को उनके द्वारा बांटे गए कर्ज के डूबने का डर सता रहा है. इसी कारण मूल्य पर कर्ज का औसत भी पिछले चार वर्षों में 67.7 फीसदी से 69.6 फीसदी के बीच हो गया है.

रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक पुणे, अहमदाबाद और मुंबई में लोगों की आय के हिसाब से EMI की दरें काफी ज्यादा है ऐसे में होमबायर्स लोन लेने से भी कतरा रहे हैं. जबकि दिल्ली चेन्नई, कोलकाता, जयपुर, लखनऊ और भोपाल में EMI में ज्यादा बदलाव नहीं आया है. इसलिए यहां पर लोन लेने की गति भी कुछ ठीक है.

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खास बात यह है कि बीते सालों में सरकार ने आर्थिक मोर्चे पर नोटबंदी और जीएसटी जैसे कई बड़े सुधारात्मक कदम उठाए हैं जिससे देश की अर्थव्यवस्था में कुछ सकारात्मक और कुछ नकारात्मक असर हुआ है. जीएसटी और नोटबंदी के बाद कईयों की नौकरियां गई तो कईयों की सैलरी में कटौती की गई जिसका असर यह हुआ कि लोगों की क्रय शक्ति में की आई है. इतना ही नही लोगों की सेविंग्स कम हुई हैं जिसके चलते वह घर खरीदने के लिए बजट नहीं बना पा रहे हैं.

इसके साथ ही मंहगाई और बैंकों की होमलोन जैसी योजनाओं पर ऊंची ब्याज दरों का असर यह हो रहा है कि एक बायर्स जो कल तक किसी तरह से खरीदने के सपने संजोए बैठा था अब उसकी जेब का बजट गड़बड़ा गया है. rbi report home buys

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