मजबूरियों ने गठबंधन तो करवा दिया पर दिल नही मिले

राजनीतिक मजबूरियों की वजह से लोकसभा चुनाव के लिए सपा-बसपा में गठबंधन हो गया है. मायावती ने भी गेस्ट हाउस कांड को भुलाकर सपा के साथ गठबंधन कर लिया है लेकिन लगता है दोनों पार्टियां साथ तो आ गई पर दिल नही मिल सके हैं.

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इसका नजारा एक बार फिर उस वक्त दिखा जब यूपी के पूर्व सीएम और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक इंटरव्यू के दौरान मायावती को पीएम बनाए जाने को लेकर गोलमोल जबाब देते हुए कहा कि इसके लिए मायावती को समर्थन जुटाना होगा. इसके साथ ही उन्होने यह भी कहा कि इस मामले में 23 मई को फैसला आने के बाद देखेंगे.

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गौरतलब है कि कल मायावती ने अंबेडकरनगर में एक रैली के दौरान पीएम बनने की इच्छा जाहिर किया था. उन्होंने कहा था कि अगर उन्हें दिल्ली जाने का मौका मिलेगा तो वह इसी सीट से चुनाव लड़ेंगी. दरअसल आंबेडकरनगर मायावती की पुरानी सीट है वो यहीं से चुनाव लड़ती रही हैं खास बात यह है कि मायावती यहां से तीन बार चुनकर संसद जा चुकी हैं.

लेकिन पिछले काफी लंबे वक्त से वह चुनाव से दूर रही हैं. हालांकि पीएम बनने को लेकर इससे पहले भी वह कई बार अपनी इच्छाएं जाहिर कर चुकी हैं. हालांकि सपा प्रमुख अखिलेश यादव खुद इस बात के लिए तैयार नही दिख रहे हैं.

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