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21/03/2019
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Supreme Court upheld hearing of Ram temple
राष्ट्रीय

राम मंदिर: रामभक्तों को फिर मिली तारीख

 

सर्वोच्च न्यायालय में जिस तरीके से लंबे समय चले आ रहे राम मंदिर मामले में सुनवाई को बार-बार टाला जा रहा है ऐसे मे न्यायालय की इन प्रक्रियाओं ने मेरे जेहन में 1993 में आई दामिनी फिल्म का वह डायलोग एक बार फिर से ताजा हो गया है जिसमें फिल्म अभिनेत्री मीनाक्षी शेषाद्री को इन्साफ दिलाने के लिए सनी देओल अदालत में केस लड़ते हैं और बार-बार मामले कि सुनवाई से आहत अदालत में चिल्ला कर कहते है “तारीख पर तारीख तारीख पर तारीख, मिलती रही लेकिन इन्साफ नहीं मिला” ऐसा ही कुछ हाल राम मंदिर मुद्दे के साथ हो रहा है जिसमें तारीख पर तारीख मिल रही है लेकिन अदालत से इस मामले में अभी तक कोई भी इन्साफ नहीं मिला. मिली तो क्या सिर्फ तारीख.Supreme Court upheld hearing of Ram temple

ताजा मामले में भी ऐसा ही हुआ है जिसमें लंबे अक्टूबर से रोके गये इस मामले में एक बार फिर से सर्वोच्च न्याय की चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए इस मामले को यह कहते हुए 10 जनवरी तक के लिए टाल दिया कि इस मामले की सुनवाई के लिए 3 जजों की विशेष पीठ का गठन किया जाएगा जो इस मामले की नियमित तौर पर सुनवाई करेगी, और अगला आदेश भी 10 जनवरी को ही जारी किया जाएगा. वहीँ सर्वोच्च न्यायालय ने राम मंदिर को लेकर दाखिल वकील हरिनाथ राम की पीआईएल को भी खारिज कर दिया है.Supreme Court upheld hearing Ram temple

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इससे पहले पूर्व जीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने इस मामले की सुनवाई को जल्द से जल्द ख़त्म करने के लिए विशेष पीठ का गठन किया था जो कि बीते साल 29 अक्टूबर से इस मामले की रेगुलर सुनवाई करने वाली थी और इस मामले को संवैधानिक पीठ में रेफर करने से भी इनकार दिया था, लेकिन उसी दौरान जस्टिस मिश्रा रिटायर हो गये जिससे यह सुनवाई थम गई और नये मुख्य न्यायधीश का पद संभालने के बाद जस्टिस रंजन गोगोई ने 29 अक्टूबर को इस मामले की सुनवाई करते हुए इसे जनवरी के पहले सप्ताह तक के लिए टाल दिया था. लेकिन अब इस मामले में एक बार फिर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने इसे अगली तारीख के लिए रेफर कर दिया गया है.Supreme Court upheld hearing Ram temple

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ख़ास बात यह है कि सर्वोच्च न्यायालय इसे मंदिर विवाद नहीं बल्कि जमीन विवाद के तौर पर देखता है और इसी को लेकर सुनवाई भी हो रही है अब जब इसकी सुनवाई एक बार फिर से टल गयी है ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि आखिर अयोध्या भूमि विवाद कितना पुराना है और इसको लेकर इतना राजनीतिक घमासान मचा हुआ है?

क्या है रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवादSupreme Court upheld hearing Ram temple

अयोध्या में रामजन्म भूमि और बाबरी मस्जिद काफी लंबे समय से चला आ रहा है जिसमें हिन्दुओं की यह मान्यता है कि यह विवादित स्थल जिस पर बाबरी मस्जिद बनी हुई थी वास्तविकता में वह राम जन्म भूमि है जहां भगवान राम का निवास था जिसे मुग़ल बादशाह बाबर ने तोड़कर उसकी जगह पर मंदिर का निर्माण करवाया था. लेकिन मुसलमान उसे बाबरी मस्जिद मानते हैं और यहाँ पर मंदिर होने की बात को नकारते हैं.

लेकिन 6 दिसंबर 1993 को अयोध्या के बाबरी मस्जिद में 3 लाख कार सेवकों ने चढाई कर बाबरी विध्वंश किया था. जिसके बाद न्यायालय ने इस मामले में आपराधिक केस के साथ दीवानी मुकदमा भी चला. और इसके बाद तारीखें बदलती गयी और फिर 30 सितंबर 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए बाबरी मस्जिद के तीन गुंबदों के बीच की जगह को हिन्दुओं को मंदिर निर्माण के लिए और बाकी के एक तिहाई हिस्से को सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड को देने का आदेश सुनाया था. हालांकि इस मामले न्यायालय के फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपील की गयी जहां इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति को बहाल कर दिया था.Supreme Court upheld hearing Ram temple

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एएसआई ने राम मंदिर के दिए थे सबूतSupreme Court upheld hearing Ram temple

अयोध्या में बाबरी मस्जिद की जगह राम मंदिर ही था और उसे तोड़कर मस्जिद का निर्माण किया गया था इस बात का खुलासा करते हुए आर्कियोलोजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि खुदाई में राम मंदिर के अवशेष मिले थे जिस पर मस्जिद का निर्माण किया गया था. एएसआई ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था उसे कार्बन डेटिंग के जरिये पता चला था कि अयोध्या एक बेहद विकसित शहर था. यहीं नहीं एएसआई ने यह भी दावा किया है कि कार्बन डेटिंग के जरिये उसे 1500 ईसा पूर्व तक की प्रमाण मिला है

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ऐसे इस बात को लेकर कोई संदेह नहीं रह जाता है कि यहाँ पर राम मंदिर ही था लेकिन फिर भी धार्मिक तौर पर बेहद संवेदनशील मुद्दा होने की वजह से इस मामले में देरी हो रही है और जानकारों का इसको लेकर यह भी मानना है कि राजनीतिक पार्टियां जानबूझकर इस मुद्दे को ज़िंदा रखने की कोशिश कर रही है ताकि उनकी राजनीतिक दुकानदारी चलती रहे है. बहरहाल इस मामले में आगे क्या होगा इसकी तस्वीर तो 10 जनवरी के बाद ही साफ़ हो पायेगी लेकिन इतना जरुर है कि सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले से वर्तमान सरकार और रामभक्त निराश जरूर है.Supreme Court upheld hearing Ram temple

  • कुलदीप सिंह

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