पंडित नेहरू की गलतियों का दंश आज भी भुगत रहा देश

पुण्य तिथि पर विशेष :

देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु की आज पूरे देश में पुण्यतिथि मनाई जा रही है. पंडित नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 को ब्रिटिश भारत के इलाहाबाद में हुआ था और उनकी मृत्यु 27 मई 1967 मे हुई थी. वह न सिर्फ स्वतंत्र भारत के पहले पीएम थे बल्कि देश की आजादी की लड़ाई के सबसे प्रखर स्वतंत्रता सेनानियों में से एक रहे. उन्होंने देश के लिए कई बलिदान दिए थे लेकिन उन्होंने जो गलतियां की थी वह उनके बलिदान से कहीं ज्यादा बड़ी और भयावह साबित हुई हैं. jawaharlal nehru

नेहरू को दिन में सपने देखने वाला नेता कहा जाता है. उनके द्वारा की गई गलतियों का दंश आज भी देश को भुगतना पड़ रहा हैं. बता दें कि जिस सुरक्षा परिषद की स्थाई सीट के लिए आज भारत दुनिया के देशों के सामने भीख मांग रहा है, उसे वह सीट 1953 में अमेरिका ने आफर किया था किया था लेकिन नेहरू ने बिना कुछ सोचे समझे उस पेशकश को ठुकराते हुए चीन को सुरक्षा परिषद में शामिल करने की सलाह दे दिया था. और यह सब उन्होंने अपने हिन्दी-चीनी भाई-भाई के नारे को चरितार्थ करने के लिए किया था. jawaharlal nehru

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लेकिन इसका उलटा असर यह हुआ कि नेहरू के इस दिवास्वप्न का फायदा उठाते हुए चीन ने 1962 में चीन ने हम पर आक्रमण कर दिया. जिसमें हमारे हजारों जवानों को शहीद होंना पड़ा था. खास बात यह रही कि 1962 में भी चीन के हमले से पहले ही खुफिया एजेंसी ने एक रिपोर्ट के जरिए पंडित नेहरू को आगाह किया था. लेकिन उस दौरान भी नेहरू ने उस रिपोर्ट को यह कहकर नकार दिया था कि “चीन हिन्दुस्तान पर कभी अटैक नही कर सकता है.” jawaharlal nehru

हालांकि हकीकत यह थी कि चीन ने न सिर्फ हिन्दुस्तान पर अटैक किया बल्कि हजारों किलोमीटर की जमान पर कब्जा भी कर लिया. इतना ही नहीं चीन ने सुरक्षा परिषद का स्थाई सदस्य बनने के बाद भारत के कई अहम प्रस्तावों पर गलत तरीके से अपनी वीटो पावर का इस्तेमाल किया. जिससे कई बार भारत को संयुक्त राष्ट्र संघ में चीन की वजह से हार का सामना करना पड़ा था.

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इतना ही नही नेहरू ने अपनी दोस्ती की खातिर देश की सुरक्षा व्यवस्था के खिलवाड़ करते हुए 1950 में कोलकाता से करीब 900 किलोमीटर दूर बंगाल की खाड़ी में स्थित भारत के कोको आईलैण्ड को म्यांमार को दे दिया था जिसे उसने चीन को किराए पर दे दिया. जहां से आज भी चाइना भारत की हर गतिविधियों पर नजर रखता है. इसके साथ ही पंडित नेहरू ने 13 जनवरी 1954 को दुनिया की सबसे खूबसूरत जगहों में से एक मणिपुर की काबू व्हेली वैली को भी दोस्ती के नाम पर म्यानमार को दे दिया. उसके बाद एक बार फिर वही हुआ जिसका डर था. म्यांमार ने फिर से यह जगह चाइना को दे दिया. और यहां से भी चीन भारत की गतिविधि पर नजर रखता है.

                                                                                                                       -कुलदीप सिंह 

3 thoughts on “पंडित नेहरू की गलतियों का दंश आज भी भुगत रहा देश

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