पद संभालते ही बढ़ी राजनाथ सिंह की चुनौतियां

राजनाथ सिंह ने देश के नए रक्षा मंत्री का पदभार संभाल लिया है और उनके सामने पाकिस्तान चीन जैसी चुनौतियां है। वहीं इन दोनों से निपटने के लिए भारत को और ज्यादा ताकत बढ़ाने के जरुरत है। बता दे की भारत दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक है और वह छोटे-छोटे हथियारों से लेकर बड़े रक्षा उपकरणों तक के लिए मुख्यतः आयात पर निर्भर रहता है और ऐसी परिस्थिति में भारत को “निर्भर” शब्द से छुटकारा पाने की जरुरत है।

वहीं इसके साथ ही सभी रक्षा प्रतिनिधियों को राजनाथ सिंह के आने से बहुत उम्मीद है और सबका ये कहना है की उनके आने से रक्षा कार्यो में तेज़ी आएगी और रक्षा के संदर्भ में सारे कामो में गति आएगी। रक्षा प्रतिनिधियों का ये भी कहना है की सैन्य आधुनिकीकरण की बहुत जरुरत है और तीनो सेनाओ के प्रमुख को भी ढांचागत सुधार का बहुत समय से इंतज़ार है।
rajnath singh defence minister

हालांकि 2014 में बीजेपी ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए में कुछ अहम शुरुआती कदम उठाने की पहल की थी और देश के सभी रक्षा प्रबंधन की मरम्मत के लिए जिन सार्थक व्यवस्थित सुधारों की जरूरत है, वैसे कदम अभी भी नहीं उठाए गए हैं। लेकिन राजनाथ सिंह के आने से सभी को यह विश्वास है की रक्षा संदर्भ में सुधार जरूर आएगा।

रक्षा मंत्रालय के अधिकारियो ने कहा है की राजनाथ सिंह का राजनीतिक कद काफी बड़ा है, इस वजह से वह कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्यॉरिटी में दमदार दखल रख पाएंगे। कई रक्षा प्रस्ताव वित्त मंत्राल में अटक जाते हैं। इस बार निर्मला सीतारमण के पास वित्त मंत्रालय है जो 20 महीने तक रक्षा मंत्री भी रह चुकी हैं और जो मंत्रालय की जरूरतों को अच्छे से जानती भी हैं तो इसी का फायदा रक्षा मंत्रालय को मिल सकता है। rajnath singh defence minister

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