अमेठी का किला भेद स्मृति ने दिखाई नारी शक्ति, अब चुनौती विकास की

बचपन में जब मैं छोटा था तो मेरे नाना जी मुझे पढाते थे लेकिन जहां मेरी सभी विषयों पर शुरू से अच्छी कमांड थी तो वहीं मेरी एक कमजोरी भी थी और वो यह थी कि मुझे मैथ नहीं आता था. जिसकी वज़ह से कई बार मैने डांट भी सुनी, लेकिन इसके साथ ही मेरे नाना एक बात कहते थे कि “सफलता का कोई शार्टकट नहीं होता. सफल होंने का एक ही रास्ता हैं और वो ये है कि इसके लिए कड़ी मेहनत की जाए.” मेरे नाना की कही वो बात मुझे हमेशा य़ाद रही.

करीब 20 साल पहले मेरे नाना की कही बात एक बार फिर से अमेठी में चरितार्थ हो गई. लोकसभा चुनाव 2019 में उत्तर प्रदेश के अमेठी से भाजपा की उम्मीदवार रहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को उनकी परंपरागत सीट रही अमेठी में करीब 55,120 मतो के अंतर से हराकर सांसद बनी. इस चुनाव में स्मृति को 4,67,598 वोट मिले थे जबकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मात्र 4,12,867 वोट ही मिले. smriti irani amethi

आज दोपहर की बड़ी ख़बरें | 27th May 2019

इससे पहले 2014 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी को 4,08,651 वोट मिले थे जबकि भाजपा प्रत्याशी स्मृति ईरानी को 3,00,748 वोट मिले थे. तब कांग्रेस अध्यक्ष ने पूर्व केंद्रीय मंत्री ईरानी को 1,07,000 वोटों के अंतर से हराया था. लेकिन इन 5 सालों में ईरानी ने हारी बाजी को पूरी तरह से अपने पक्ष में पलट दिया. smriti irani amethi

इसके पीछे खास वजह यह मानी जाती है कि जहां राहुल गांधी 2014 में चुनाव जीतने के बाद अमेठी को एक तरह से भूल ही गए वहीं दूसरी तरफ स्मृति ईरानी ने 5 सालों में अमेठी में कई विकास कार्य करवाए और वहां की जनता के दिलों में अपनी एक खास जगह बनाने में कामयाब रहीं. अमेठी लंबे समय से गांधी परिवार की परंपरागत सीट रही है.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के पिता और पूर्व पीएम राजीव गांधी इस सीट से कई बार सांसद रहें थे. उनके बाद राहुल गांधी अमेठी से लगातार सांसद रहें लेकिन इस बार के चुनाव में स्मृति ने राहुल गांधी को हराकर यह सीट अपने नाम कर लिया है. ईरानी की यह जीत 2019 लोकसभा चुनावों की सबसे बड़ी जीत को रूप में जानी जा रही है. इसका कारण यह है कि इस सीट पर ईरानी ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को हराया है. इस जीत से ईरानी ने यह साबित कर दिया है कि ईमानदारी से की गई मेहनत का कोई तोड़ नहीं है. smriti irani amethi

यह सब्जी नहीं ब्लड बनाने की मशीन है

अमेठी के जानकारों का मानना है कि स्मृति ईरानी यहाँ दशकों पुरानी लोगों की गांधी परिवार के प्रति बने अंधविश्वास को तोड़ने में शपल रहीं हैं इसलिए यह जीत बेहद अहम हो जाती हैं. जानकार बताते हैं कि अमेठी की स्थिति इस तरह रही है कि यहां के लोगों को यह पता होंने के बावजूद कि यहाँ पर बहुत ही अव्यवस्थाएं हैं फिर भी अपना वोट गांधी परिवार को ही देते थे.     

हालांकि, ईरानी ने यहां पर जीत हासिल कर लिया है और सांसद बनकर संसद पहुंच चुकी हैं. लेकिन असली चुनौती अब उनके सामने आई है और वो है अमेठी का विकास. अमेठी गांधी परिवार का गढ़ होने के बावजूद अब तक विकास से अछूता हैं. ऐसे में ईरानी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यहाँ पर बिजली, पानीस सड़क और रोजगार की व्यवस्था करना हैं. क्योंकि विकास नहीं हो पाने के कारण लोग बड़ी संख्या में दूसरे शहरों और राज्यों मे पलायन करने के लिए मजबूर हैं.

-कुलदीप सिंह 

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